आरक्षण पर NDA में ही घमासान, चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री मांझी और उनके बेटे का मांग लिया इस्तीफा

चिराग पासवान ने दलितों के साथ कथित भेदभाव को लेकर कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से सवाल किया, उन्होंने कहा कि देश की आज़ादी के बाद से लंबे समय तक सत्ता में रहने वालों को यह बताना चाहिए कि ऐसा भेदभाव क्यों बना हुआ है.

Aug 29, 2026 - 17:19
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आरक्षण पर NDA में ही घमासान, चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री मांझी और उनके बेटे का मांग लिया इस्तीफा

नई दिल्ली:

आरक्षण पर बढ़ते बहस के बीच अब एनडीए के अंदर ही मतभेद दिखने लगे हैं. दलित आरक्षण में क्रीमी लेयर के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बयान पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पलटवार किया है. उन्होंने केंद्र में मंत्री मांझी और बिहार सरकार में मंत्री उनके बेटे संतोष सुमन से इस्तीफे की मांग कर डाली. चिराग ने कहा कि जब दलित और महादलित का बंटवारा करने की कोशिश हुई थी, तब भी उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी.

चिराग पासवान ने कहा, "मैं अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोगों को आरक्षण देने की बात कर रहा हूं. उनके बारे में लोग पूछते हैं, इसमें 'क्रीमी लेयर' का प्रावधान क्यों नहीं है? तो ठीक है, वे इसे छोड़ दें, वे आरक्षण का लाभ लेना बंद कर दें. अगर जीतन राम मांझी को लगता है कि ये उपाय लागू होने चाहिए, तो क्या उन्हें पहले इस्तीफा नहीं देना चाहिए? उन्हें 'क्रीमी लेयर' का कॉन्सेप्ट लाना चाहिए, आखिरकार, वे भी तो उसी कैटेगरी में आएंगे, है ना? उन्हें इस्तीफा देना चाहिए, और उनके बेटे को, जो यहां मौजूद हैं, उन्हें भी इस्तीफा देना चाहिए."

संतोष सुमन ने की थी आरक्षण की समीक्षा की मांग

बिहार सरकार में मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के नेता संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण को लेकर कहा था कि इसकी समीक्षा होनी चाहिए. लेकिन इसे खत्म नहीं किया जाना चाहिए. आरक्षण का फायदा उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है. सुमन ने SC-ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी समर्थन किया. उन्होंने कहा कि दलित समाज की कुछ जातियों को लंबे समय से आरक्षण का ज्यादा लाभ मिला है, जबकि कई जातियां अभी भी पीछे हैं. इसलिए आरक्षण के भीतर जरूरतमंद और अधिक पिछड़ी जातियों के लिए अलग हिस्सा तय करने पर विचार किया जाना चाहिए, उन्होंने कहा कि 79 साल की आजादी के बाद यह सवाल पूछना गलत कैसे हो सकता है कि आरक्षण का लाभ किन वर्गों को कितना मिला और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े कौन-से लोग आज भी इससे वंचित हैं?

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि जो लोग आरक्षण के आकलन की बात करते हैं, वे सही मायनों में आरक्षण और खासतौर पर अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को समझ नहीं पा रहे हैं.

चिराग ने कहा, "जो लोग आरक्षण के आकलन की बात करते हैं, वे सही मायनों में आरक्षण और खासतौर पर अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को समझ नहीं पर रहे हैं. आरक्षण का आकलन करने का मतलब है लोगों को सिस्टम से बाहर करना और इसके दायरे को कम करना. संविधान में हर स्‍तर पर हर तरीके के आरक्षण की व्‍यवस्‍था है. जब आप अनुसूचित जाति और जनजाति में आरक्षण की बात करते हैं तो यहां पर आधार आर्थिक हो ही नहीं सकता है. यह सामाजिक न्याय की लड़ाई है. इसका आधार ही सामाजिक न्‍याय का रहा है."

उन्‍होंने कहा कि अनुसूचित जाति से आने वाले ये कौन से लोग हैं? ये वो लोग हैं जिनको संविधान ने शेड्यूल किया है, जिनका आधार छुआछूत रहा है, जिनको गांव से दूर रखा जाता था, छूना तो दूर की बात है, देखना पाप माना जाता था. वहीं, शेड्यूल ट्राइब (अनुसूचित जनजाति) की अलग विशेषताएं (वेश-भूषा, रहन-सहन और बोल-चाल) रही हैं.

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