कारण बताओ नोटिस को असाधारण मामलों में रिट अधिकार क्षेत्र में चुनौती दी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

Apr 3, 2026 - 16:54
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कारण बताओ नोटिस को असाधारण मामलों में रिट अधिकार क्षेत्र में चुनौती दी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि यद्यपि अदालतें आमतौर पर कारण बताओ नोटिस (SCN) को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं पर विचार नहीं करती हैं। फिर भी यह सिद्धांत पूर्ण नहीं है और असाधारण परिस्थितियों में नोटिस के चरण पर हस्तक्षेप की अनुमति है। अदालत ने टिप्पणी की कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा का सहारा तब लिया जा सकता है, जब कारण बताओ नोटिस में ऐसी मौलिक कानूनी कमियां हों, जिनके परिणामस्वरूप स्पष्ट अन्याय हो सकता है।

अदालत ने कहा कि यद्यपि सामान्य नियम कारण बताओ नोटिसों को चुनौती देने को हतोत्साहित करता है, फिर भी हाईकोर्ट्स को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार है, जहां नोटिस में अधिकार क्षेत्र की स्पष्ट कमी हो, उसमें बिना सोचे-समझे काम करने की झलक हो, उसे पहले से तय या सुनियोजित दृष्टिकोण के साथ जारी किया गया हो, वह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग हो, या वह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता हो।

खंडपीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसी स्थितियों में हाईकोर्ट अन्याय को रोकने के लिए अपने रिट अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने में उचित होगा। साथ ही इस बात को भी रेखांकित किया कि कारण बताओ नोटिस के चरण पर हस्तक्षेप न करने का नियम विवेक का नियम है, न कि कोई कठोर प्रतिबंध। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने टिप्पणी की: "इस अदालत ने लगातार यह माना कि यद्यपि आमतौर पर SCN के विरुद्ध रिट याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता। फिर भी यह प्रस्ताव कोई अटल नियम नहीं है। SCN के चरण पर हस्तक्षेप की अनुमति असाधारण परिस्थितियों में है, जैसे कि जहां नोटिस में अधिकार क्षेत्र की स्पष्ट कमी हो, उसमें बिना सोचे-समझे काम करने की झलक हो, उसे पहले से तय या सुनियोजित दृष्टिकोण के साथ जारी किया गया हो, वह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग हो, या उसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होता हो। ऐसी स्थितियों में हाईकोर्ट स्पष्ट अन्याय को रोकने के लिए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने में उचित होगा।"

इस संदर्भ में 'यूनियन ऑफ इंडिया बनाम VICCO लैबोरेटरीज' (2007) 13 SCC 270 मामले में दिए गए निर्णय का हवाला दिया गया, जिसमें यह टिप्पणी की गई: "जहां कोई कारण बताओ नोटिस या तो बिना अधिकार क्षेत्र के जारी किया जाता है, या कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए जारी किया जाता है तो निश्चित रूप से ऐसे मामले में रिट अदालत कारण बताओ नोटिस जारी होने के चरण पर भी हस्तक्षेप करने में संकोच नहीं करेगी।" अदालत ने ये टिप्पणियां 'विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम' (FEMA) के तहत चल रही अधिनिर्णयन (Adjudication) की कार्यवाही में जारी किए गए एक कारण बताओ नोटिस को दी गई चुनौती के संदर्भ में कीं।

 Cause Title: J. SRI NISHA VERSUS THE SPECIAL DIRECTOR, ADJUDICATING AUTHORITY, DIRECTORATE OF ENFORCEMENT AND ANR.

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