दूसरे देशों के राष्ट्रीय प्रमुखों की सुरक्षा कैसे करते हैं भारतीय जवान? जानें सिक्योरिटी प्रोटोकॉल

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले विदेशी मेहमानों की सिक्योरिटी का पूरा इंतजाम किया जा रहा है. आइए जानते हैं कि उनकी सुरक्षा कैसे की जाती है.

Sep 11, 2026 - 17:02
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दूसरे देशों के राष्ट्रीय प्रमुखों की सुरक्षा कैसे करते हैं भारतीय जवान? जानें सिक्योरिटी प्रोटोकॉल

18वें ब्रिक्स समिट में शामिल होने वाले हर विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की मुख्य गाड़ी में एक भारतीय पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर को तैनात किया जाएगा. यह व्यवस्था भारत सरकार के सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आती है और इसे विदेशी मेहमानों की सुरक्षा का एक जरूरी हिस्सा माना जाता है. इस सम्मेलन के लिए कई राष्ट्राध्यक्षों के दिल्ली आने की वजह से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने होटलों, सड़कों, वेन्यू और आने-जाने के रास्तों पर कई स्तर वाली सुरक्षा व्यवस्था की है. आइए जानते हैं कि जब दूसरे देश के राष्ट्रीय प्रमुख भारत आते हैं तो उनकी सुरक्षा कैसे की जाती है.

विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा आमतौर पर कई सुरक्षा घेरों के जरिए की जाती है. इसमें हर घेरे की एक खास जिम्मेदारी होती है. पहले घेरे या फिर अंदरूनी घेरे में आने वाले नेता के अपने करीबी सुरक्षा कर्मी और साथ ही काफी अच्छी तरह से प्रशिक्षित भारतीय सुरक्षाकर्मी होते हैं. ये सुरक्षाकर्मी मेहमान के सबसे करीब रहते हैं और किसी भी सीधे खतरे का तुरंत जवाब देते हैं. 

दूसरा घेरा केंद्रीय सुरक्षा और अर्धसैनिक बलों के खास तौर पर प्रशिक्षित कर्मियों से बनता है. इनमें सीआरपीएफ या फिर सीआईएसएफ के जवान शामिल होते हैं. उनका काम सुरक्षा घेरे को मजबूत करना और सुरक्षित व्यक्ति के आसपास आने जाने वालों पर नजर रखना है. 

तीसरा और चौथा घेरा बाहरी घेरा बनाते हैं. स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां बड़े इलाके की सुरक्षा करती हैं. वे सड़क, होटल, इवेंट वेन्यू और आसपास की जगह पर नजर रखती हैं. ऐसा इसलिए ताकि संभावित खतरों की पहचान की जा सके और उन्हें अंदरूनी सुरक्षा घेरे तक पहुंचने से पहले ही रोका जा सके. 

आने से पहले ही एडवांस्ड सिक्योरिटी लाइजन शुरू हो जाता है 

विदेशी नेता के भारत पहुंचने से काफी पहले ही सुरक्षा की तैयारी शुरू हो जाती है. एडवांस्ड सिक्योरिटी लाइजन प्रकिया के तहत भारतीय एजेंसियां आने वाले देश के सुरक्षा अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाती हैं.

खुफिया जानकारी का आकलन किया जाता है, संभावित खतरों की जांच की जाती है और साथ ही मेहमान के प्रस्तावित मूवमेंट की विस्तार से समीक्षा भी की जाती है. यात्रा से जुड़े रास्तों, ठहरने की जगह, समिट वेन्यू और दूसरी जगह का निरीक्षण किया जाता है और उसी के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाता है. 

काफिले की सुरक्षा कैसे की जाती है? 

विदेशी मेहमानों को ले जाने वाला काफिला सुरक्षा ऑपरेशन का एक और जरूरी हिस्सा है. मेहमानों के आने-जाने के लिए सुरक्षित गाड़ियों का इस्तेमाल किया. इसी के साथ खास सुरक्षा गाड़ियां काफिले के साथ चलती हैं. 

कुछ खास रिमोट सिग्नल और कम्युनिकेशन आधारित खतरों से निपटने के लिए जैमर गाड़ियों को तैनात किया जा सकता है. काफिले में नकली या फिर डमी गाड़ियों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि देखने वाले के लिए उस असली गाड़ी की पहचान करना मुश्किल हो जाए जिसमें आने वाला नेता सवार है. पूरे रास्ते को पहले से ही सुरक्षित कर लिया जाता है. इसी के साथ जरूरी जगह पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं और जरूरत पड़ने पर कुछ इलाकों में लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई जाती है. 

एंटी ड्रोन सिस्टम 

आजकल सुरक्षा अभियानों में हवाई और तकनीकी खतरों पर भी काफी ज्यादा ध्यान दिया जाता है. संवेदनशील जगहों और ठहरने की जगह के आस-पास एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए जाते हैं. ऐसा इसलिए ताकि बिना इजाजत उड़ने वाले ड्रोन का पता लगाया जा सके या फिर उन्हें रोका जा सके. 

जरूरी जगहों पर हाईटेक सीसीटीवी निगरानी का भी इस्तेमाल किया जाता है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी सिस्टम सुरक्षा कर्मियों को संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने, भीड़ का विश्लेषण करने और आगे की जांच के लिए संभावित सुरक्षा चिंता को पहचानने में मदद कर सकते हैं.

विदेशी सुरक्षा टीम भारतीय एजेंसी के साथ मिलकर काम करती हैं 

सुरक्षा अभियान को सिर्फ भारतीय कर्मी ही नहीं संभालते. विदेशी राष्ट्राध्यक्ष आमतौर पर अपनी खुद की सुरक्षा टीम और खास सुरक्षा जरूरतों के साथ आते हैं. भारतीय एजेंसियां पूरी यात्रा के दौरान इन विदेशी टीम के साथ तालमेल बिठाकर काम करती हैं

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