फर्जी DL रैकेट का भंडाफोड़: RTO के पीछे 2500 में बनते थे नकली ड्राइविंग लाइसेंस, भिंड में दो आरोपी गिरफ्तार

भिंड में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस रैकेट का खुलासा हुआ है. पुलिस ने RTO के पीछे चल रहे इस गिरोह से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो 2500 रुपए में नकली DL बनाते थे.

May 16, 2026 - 19:01
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फर्जी DL रैकेट का भंडाफोड़: RTO के पीछे 2500 में बनते थे नकली ड्राइविंग लाइसेंस, भिंड में दो आरोपी गिरफ्तार

मध्यप्रदेश के भिंड जिले में नकली ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के एक संगठित गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. हैरान करने वाली बात यह है कि यह फर्जीवाड़ा जिला परिवहन कार्यालय (RTO) के ठीक पीछे खुलेआम चल रहा था. कोतवाली थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो महज 2500 रुपए में नकली लाइसेंस तैयार कर लोगों को ठग रहे थे. पुलिस ने मौके से लैपटॉप, प्रिंटर, मोबाइल फोन, फर्जी DL और सैकड़ों खाली कार्ड बरामद किए हैं. इस कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग के आसपास सक्रिय एजेंटों और दलालों में हड़कंप मच गया है, जबकि पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच में जुटी है.

शिकायत से खुला फर्जीवाड़े का पूरा खेल

मामले का खुलासा 14 मई को उस वक्त हुआ जब एक व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई. शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने 2500 रुपए देकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था, लेकिन जब उसे परिवहन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर चेक किया गया, तो वह लाइसेंस फर्जी निकला. इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की.

RTO के पीछे चल रहा था ‘धंधा'

जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि जिला परिवहन कार्यालय के पीछे लंबे समय से नकली लाइसेंस बनाने का काम किया जा रहा है. इसके बाद कोतवाली थाना पुलिस ने योजना बनाकर मौके पर दबिश दी, जहां से दो आरोपी प्रमोद यादव और सुमित चौधरी को गिरफ्तार किया गया.

एजेंट बनकर लोगों को जाल में फंसाते थे आरोपी

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक परिवहन विभाग में एजेंट के तौर पर सक्रिय था. वह लोगों का भरोसा जीतकर उन्हें कम समय में लाइसेंस बनवाने का झांसा देता था. इसके बाद उनसे पैसे लेकर फर्जी लाइसेंस तैयार कर दिए जाते थे.

मौके से बरामद हुआ फर्जीवाड़े का सामान

छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की, जिसमें शामिल हैं:

एक लैपटॉपप्रिंटरएंड्रॉयड मोबाइल फोनतीन तैयार फर्जी ड्राइविंग लाइसेंससैकड़ों खाली प्लास्टिक कार्ड

पुलिस का मानना है कि इन्हीं उपकरणों की मदद से लंबे समय से फर्जी लाइसेंस तैयार किए जा रहे थे.

2500 रुपए में तैयार होता था नकली DL

प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी प्रति लाइसेंस करीब 2500 रुपए लेते थे. कम समय और आसान प्रक्रिया का लालच देकर वे लोगों को फंसा लेते थे. इससे न केवल लोगों के साथ धोखाधड़ी होती थी, बल्कि सड़क सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा था.

पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस ने रिमांड पर लिया है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल है? अब तक कितने लोगों को फर्जी DL जारी किए गए? क्या परिवहन विभाग के कुछ अफसर या कर्मचारी भी इसमें शामिल हैं?

कार्रवाई के बाद मचा हड़कंप

इस कार्रवाई के बाद RTO के आसपास सक्रिय एजेंटों और दलालों में हड़कंप मच गया है. स्थानीय व्यापारियों और लोगों ने भी पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया है और ऐसे फर्जी रैकेट पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

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