बेटियों ने फिर दिखाया दम, हर स्तर पर लड़कों को पछाड़ा

एमपी बोर्ड परीक्षा परिणाम 2026 में लड़कियों का प्रदर्शन शानदार रहा. प्रथम और द्वितीय श्रेणी में भी बेटियों की संख्या लड़कों से अधिक रही, जिससे यह साफ हुआ कि बोर्ड की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षा में भी छात्राएं ज्यादा स्थिर और अनुशासित प्रदर्शन कर रही हैं.

Apr 15, 2026 - 18:03
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बेटियों ने फिर दिखाया दम, हर स्तर पर लड़कों को पछाड़ा

मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा 2026 के परिणामों में एक बार फिर बेटियों ने शैक्षणिक मोर्चे पर बाजी मार ली है. चाहे कुल पास प्रतिशत हो, नियमित परीक्षार्थियों का प्रदर्शन, प्रावीण्य सूची या विषयवार टॉपर्स, हर जगह छात्राएं छात्रों से आगे नजर आईं. बोर्ड के आंकड़े साफ बताते हैं कि मेहनत, निरंतरता और अनुशासन के दम पर बेटियों ने न केवल सफलता का स्तर ऊंचा किया, बल्कि शिक्षा के बदलते सामाजिक परिदृश्य को भी मजबूती दी है. शिक्षा विशेषज्ञ इसे प्रदेश में बालिका शिक्षा, योजनाओं और सामाजिक सोच में आए बदलाव का सकारात्मक परिणाम मान रहे हैं. एमपी बोर्ड के ये नतीजे बताने के लिए काफी हैं कि अब बेटियां किसी भी स्तर पर पीछे नहीं हैं.

हाईस्कूल परीक्षा: छात्राओं का पास प्रतिशत कहीं आगे

हाईस्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा 2026 में कुल पास प्रतिशत 73.42 फीसदी दर्ज किया गया, लेकिन जब जेंडर आधारित आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो तस्वीर और स्पष्ट हो जाती है. इस परीक्षा में नियमित छात्राओं का पास प्रतिशत 77.52 रहा, जबकि नियमित छात्रों का पास प्रतिशत 69.31 ही दर्ज हुआ. यानी छात्राओं ने सीधे तौर पर 8 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के साथ लड़कों को पीछे छोड़ दिया. यह अंतर केवल संयोग नहीं, बल्कि लगातार चौथे‑पांचवें साल देखने को मिल रहा रुझान है.

हायर सेकेंडरी में भी बेटियों का दबदबा

हायर सेकेंडरी परीक्षा 2026 में भी यही कहानी दोहराई गई. कुल मिलाकर परीक्षा परिणाम 76.01 फीसदी रहा, लेकिन यहां भी छात्राओं की सफलता दर ज्यादा रही. बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार नियमित छात्राओं का पास प्रतिशत 79.41 रहा, जबकि नियमित छात्रों का पास प्रतिशत 72.39 दर्ज हुआ. करीब 7 प्रतिशत का यह अंतर बताता है कि जैसे‑जैसे कक्षा स्तर बढ़ता है, बेटियों का प्रदर्शन और निखरता जाता है.

हाईस्कूल (10वीं)

लड़के : 69.31%लड़कियां : 77.52%अंतर : +8.21% (लड़कियां आगे)

हायर सेकेंडरी (12वीं)

लड़के : 72.39%लड़कियां : 79.41%अंतर : +7.02% (लड़कियां आगे)

प्रावीण्य सूची में भी बेटियों की मजबूत हिस्सेदारी

केवल पास प्रतिशत ही नहीं, बल्कि प्रावीण्य सूची (टॉपर लिस्ट) में भी बेटियों का दबदबा साफ नजर आया. हाईस्कूल परीक्षा की प्रावीण्य सूची में कुल 378 विद्यार्थियों ने स्थान पाया, जिनमें 235 छात्राएं और 143 छात्र शामिल रहे. इसी तरह हायर सेकेंडरी परीक्षा की प्रावीण्य सूची में 221 विद्यार्थियों में से 158 छात्राएं थीं, जबकि छात्रों की संख्या सिर्फ 63 रही. यह आंकड़े बताते हैं कि उच्च अंक हासिल करने की सूची में बेटियां लगभग दोगुनी संख्या में मौजूद रहीं.

विज्ञान, वाणिज्य और कला; हर संकाय में आगे छात्राएं

विषयवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो विज्ञान, वाणिज्य, कृषि, कला और गृह विज्ञान जैसे लगभग सभी संकायों में छात्राओं ने शीर्ष स्थानों पर कब्जा किया.

वाणिज्य और कला समूह में तो कई स्थानों पर संयुक्त टॉपर रहीं छात्राओं ने बाजी मारी. वहीं विज्ञान और विज्ञान‑गणित जैसे चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले विषयों में भी लड़कियों का प्रदर्शन किसी से कम नहीं रहा.

सरकारी स्कूलों में भी बेटियां आगे

सरकारी स्कूलों के परिणामों में भी छात्राएं आगे नजर आईं. हायर सेकेंडरी सरकारी स्कूलों का कुल पास प्रतिशत 80.43 रहा, जिसमें छात्राओं की सफलता दर अधिक रही. यह दर्शाता है कि सरकारी स्कूलों में मिलने वाली शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ बेटियां अधिक गंभीरता और नियमितता से उठा रही हैं.

बदलती सामाजिक सोच और शिक्षा योजनाओं का असर

शिक्षाविदों का मानना है कि मुख्यमंत्री कन्या शिक्षा प्रोत्साहन, छात्रवृत्ति योजनाएं, साइकिल योजना और अभिभावकों की बदलती सोच ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है. अब बेटियों को पढ़ाई में करियर और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम माना जा रहा है, जिसका सीधा असर परिणामों में दिख रहा है

सफलता की नई पहचान बनी बेटियां

MP बोर्ड रिजल्ट 2026 यह साफ संदेश देता है कि प्रदेश में शिक्षा की तस्वीर बदल रही है. बेटियां न केवल बराबरी पर हैं, बल्कि कई मामलों में आगे निकल चुकी हैं. आंकड़ों की ये कहानी आने वाले वर्षों में लड़कियों के और मजबूत शैक्षणिक नेतृत्व की ओर इशारा करती है.

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