ऋतब्रत बनर्जी बंगाल में बने विपक्ष के नेता, स्पीकर ने TMC के बागी गुट को दी मंजूरी
तृणमूल कांग्रेस में जारी अंदरूनी कलह अब ऐसे मुकाम पर पहुंच गया है, जहां सुलह की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही है. बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बोस ने पार्टी से बगावत कर चुके नेता ऋतब्रता बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने की मंजूरी दे दी है.
पश्चिम बंगाल में विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतब्रता बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मंजूरी दे दी है. विपक्ष के लिए आवंटित विधानसभा कक्ष की चाबी ऋतब्रता बंदोपाध्याय को सौंप दी गई है. ऋतब्रता बंदोपाध्याय ने कहा कि हम ममता बनर्जी से अनुरोध करते हैं कि वे हमारे इस विपक्षी मोर्चे की मुख्य सलाहकार बनें.
निष्कासित टीएमसी नेता ऋतब्रता बनर्जी ने कहा कि हमने अभी-अभी पत्र जमा किया है. विपक्ष के नेता (एलओपी) के लिए निर्धारित कमरा आधिकारिक तौर पर आवंटित कर दिया गया है. एलओपी फिलहाल वहीं बैठे हैं. हमारी इच्छा है कि ममता दीदी हमारी सलाहकार बनी रहें और हमें अपना मार्गदर्शन देती रहें ताकि हम, एलओपी और मुख्य सचेतक के साथ मिलकर विधानसभा में पार्टी का प्रभावी नेतृत्व कर सकें. पार्टी की जो दयनीय स्थिति है, उसमें कुछ हद तक अभिषेक बनर्जी की विफलता है. आखिरकार, अगर आप सफलता का श्रेय लेते हैं, तो असफलता की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिए.
हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के एक महीने बाद तृणमूल कांग्रेस में विभाजन की खबर अब आधिकारिक हो गई है. विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने पार्टी से निष्कासित विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा के नेतृत्व में बगावत कर दी है.
बुधवार को विधानसभा में एक नया प्रस्ताव पेश किया गया, जिस पर इन 58 विधायकों के हस्ताक्षर थे. इसमें दावा किया गया कि वे ही तृणमूल कांग्रेस के असली प्रतिनिधि हैं. इस प्रस्ताव में हावड़ा जिले की उलुबेरिया (पूर्व) विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) नामित किया गया है.
इसी प्रस्ताव में तृणमूल कांग्रेस के विधायकों को विपक्ष का उप नेता नामित किया गया है. इनमें उत्तरी कोलकाता की एंटाली विधानसभा सीट से संदीपान साहा, पश्चिम मेदिनीपुर जिले के केशपुर से शिउली साहा और दक्षिण 24 परगना जिले के कस्बा से जावेद अहमद खान शामिल हैं.
जिन 58 विधायकों के हस्ताक्षर इस प्रस्ताव पर थे, वे सभी सुबह से एक-एक करके विधानसभा परिसर में पहुंचने लगे. इसके बाद बागी विधायकों की एक आपात बैठक हुई, जिसमें विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित पांच सीटों के लिए पांच नामों का अनुमोदन किया गया. इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायक स्पीकर के कक्ष में गए और प्रस्ताव प्रस्तुत किया. स्पीकर ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया.
पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर के कार्यालय को एक पत्र भेजा था. इसमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष (एलओपी), नैना बंदोपाध्याय और असीमा पात्रा को विपक्ष की दो उप नेता और फिरहाद हकीम को विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के विधायी दल का मुख्य सचेतक नामित किया गया था.
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