ट्विशा केस: गिराबाला-समर्थ को राहत नहीं, 30 जून तक ज्यूडिशियल कस्टडी मिली, जानें कोर्ट में क्या हुआ?

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में कोर्ट ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को राहत नहीं देते हुए 30 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. सुनवाई के दौरान आरोपियों ने जेल व्यवस्था, अखबार और वकील से मिलने के समय को लेकर शिकायतें भी कीं.

Jun 16, 2026 - 17:41
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ट्विशा केस: गिराबाला-समर्थ को राहत नहीं, 30 जून तक ज्यूडिशियल कस्टडी मिली, जानें कोर्ट में क्या हुआ?

भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को हुई सुनवाई में आरोपियों को कोई राहत नहीं मिली. जिला कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पूर्व जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को 30 जून तक न्यायिक हिरासत (ज्यूडिशियल कस्टडी) में रखने का आदेश दिया है. अदालत ने जहां अगली सुनवाई की तारीख तय की, वहीं जेल में मिल रही सुविधाओं को लेकर उठी शिकायतों पर भी स्पष्ट निर्देश दिए.

30 जून तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

मामले की सुनवाई जिला न्यायालय की जज शोभना भलावे की अदालत में हुई. सुनवाई के दौरान सीबीआई और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ा दी. अब इस केस की अगली सुनवाई भी उसी दिन होगी, जहां आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी.

जेल की व्यवस्था पर कोर्ट सख्त

सुनवाई के दौरान आरोपियों ने जेल में मिल रही सुविधाओं और व्यवहार को लेकर शिकायतें रखीं. इस पर कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि जेल मैनुअल का ठीक से पालन किया जाए और किसी भी कैदी के अधिकारों का उल्लंघन न हो. अदालत ने साफ किया कि नियमों के तहत जो भी सुविधाएं मिलनी चाहिए, वह सुनिश्चित की जाएं.

अदालत में उठे चौंकाने वाले आरोप

सुनवाई के दौरान माहौल उस वक्त अलग हो गया जब जेल में बंद गिरिबाला सिंह ने सीधे जज के सामने अपनी बात रखी. उन्होंने आरोप लगाया कि जेल में उन्हें पूरा अखबार नहीं दिया जाता. उनके मुताबिक, जो अखबार मिलते हैं उनमें उनके केस से जुड़ी खबरों को काट दिया जाता है. गिरिबाला ने कोर्ट से कहा कि उन्हें कटी हुई खबरें नहीं, बल्कि पूरा अखबार दिया जाए ताकि वे मामले से जुड़ी बाहरी जानकारी से अवगत रह सकें.

वकील से मिलने के समय को लेकर शिकायत

गिरिबाला ने यह भी कहा कि उन्हें अपने वकील से बात करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है. उनका तर्क था कि इससे वे अपना पक्ष ठीक से तैयार नहीं कर पा रही हैं. उन्होंने कोर्ट से मांग की कि कानूनी सलाह के लिए पर्याप्त समय दिया जाए, ताकि वे अपने बचाव को मजबूती से रख सकें.

सबूतों को लेकर भी उठाई मांग

सुनवाई के दौरान गिरिबाला ने ट्विशा से जुड़े सीजर मेमो की मांग भी रखी. उनका कहना है कि इस सूची में ट्विशा की दवाइयों के पर्चे और जब्त की गई दवाओं का विवरण शामिल है, जो इस मामले की सच्चाई समझने के लिए जरूरी है. बचाव पक्ष इसे अपने केस के लिए अहम सबूत मान रहा है. 

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