महाकाल दरबार पहुंचे 8 लाख के दुर्लभ आम: 18 कुत्तों के पहरे में पके फल देखने उमड़े श्रद्धालु
महाकाल मंदिर में जबलपुर के दंपति ने चढ़ाया 2.70 लाख रुपये किलो का जापानी मियाज़ाकी आम. अंतरराष्ट्रीय बाजार में 8 लाख रुपये कीमत वाले इन 8 दुर्लभ आमों की सुरक्षा के लिए बगीचे में तैनात रहते हैं 18 विदेशी कुत्ते.
उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में श्रद्धालु अक्सर सोना, चांदी, रत्न और नकदी चढ़ाते हैं. लेकिन मंगलवार को उज्जैन में बाबा महाकाल के दरबार में एक अनूठा नजारा देखने को मिला. जबलपुर से आए एक श्रद्धालु दंपति ने बाबा महाकाल को दुनिया की सबसे दुर्लभ और महंगी किस्मों के आम अर्पित किए. इन आमों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 8 लाख रुपये बताई जा रही है. इसके अलावा दंपति ने ऑस्ट्रेलिया का प्रसिद्ध R2-E2 आम और ऑस्ट्रेलियन मैंगो भी बाबा महाकाल के दरबार में अर्पित किए. दुर्लभ प्रजाति के इन आमों की खबर फैलते ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच इन्हें देखने की होड़ मच गई.
12 एकड़ का फार्म और 2014 से चली आ रही परंपरा
जबलपुर निवासी संकल्प सिंह परिहार और उनकी पत्नी रानी सिंह परिहार मंगलवार को महाकाल मंदिर पहुंचे. उन्होंने भगवान महाकाल का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर करीब 3 किलो वजन के 8 प्रीमियम मियाजाकी आम भोग स्वरूप अर्पित किए.
संकल्प परिहार ने खुद बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से आम की खेती कर रहे हैं और उनका 12 एकड़ में 'महाकाल हाइब्रिड फार्म' फैला हुआ है. दंपति का मानना है कि उनकी खेती की सफलता बाबा महाकाल का ही आशीर्वाद है, इसलिए वे साल 2014 से अपनी हर पहली फसल का पहला फल सबसे पहले बाबा महाकाल के चरणों में अर्पित करते हैं.
क्यों बेहद खास है मियाज़ाकी आम ?
भोग में अर्पित किए गए आमों में सबसे बड़ा आकर्षण जापान की मशहूर 'मियाज़ाकी' (Miyazaki) प्रजाति का आम रहा है. इस किस्म का मूल नाम 'ताइयो-नो-टोमागो' (Taiyo no Tomago) है, जिसका जापानी में अर्थ 'सूर्य का अंडा' (Egg of the Sun) होता है. यह मूल रूप से जापान के मियाज़ाकी प्रांत में उगाया जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 2.70 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है. मियाज़ाकी आम अपने गहरे लाल रंग, औषधीय गुणों, अत्यधिक मिठास और एंटी-ऑक्सीडेंट्स की प्रचुर मात्रा के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है.
बगीचे की रखवाली में 18 विदेशी कुत्ते और सीसीटीवी
परिहाल दंपत्ति ने बताया कि इतने महंगे और दुर्लभ आमों की सुरक्षा भी किसी वीआईपी सुरक्षा से कम नहीं है. संकल्प परिहार के मुताबिक आमों को चोरी से बचाने के लिए उनके बगीचे में सीसीटीवी कैमरों के साथ विदेशी नस्ल के 18 कुत्ते तैनात किए गए हैं, जिन्हें रात के समय पूरे बगीचे में खुला छोड़ दिया जाता है. उनके फार्म में मियाज़ाकी के अलावा मल्लिका, आम्रपाली, ब्लैक मैंगो जैसी 24 पारंपरिक किस्मों के 1000 पेड़ और 52 एक्सक्लूसिव ब्रीड के आम के पेड़ मौजूद हैं. वे एक दशक से अधिक समय से इसकी खेती कर रहे हैं.
साभार