महिला जज को मिल रही धमकियों पर हाईकोर्ट सख्त; MP सरकार और DGP से मांगा जवाब, जानिए क्या है मामला

सिवनी मालवा की महिला न्यायाधीश तबस्सुम खान को कथित धमकियों के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार और DGP से सुरक्षा इंतजामों पर जवाब मांगा है.

Jul 3, 2026 - 17:00
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महिला जज को मिल रही धमकियों पर हाईकोर्ट सख्त; MP सरकार और DGP से मांगा जवाब, जानिए क्या है मामला

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सिवनी मालवा की महिला न्यायाधीश तबस्सुम खान को कथित तौर पर मिल रही धमकियों के मामले को गंभीरता से लिया है. न्यायाधीश द्वारा गौहत्या से जुड़े एक मामले में 14 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां और धमकी भरे संदेश सामने आए थे. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्वतः संज्ञान लिया है. अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से पूछा है कि न्यायाधीश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं.

हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने महिला न्यायाधीश को मिल रही धमकियों के मामले में गंभीर रुख अपनाया है. जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की पीठ ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. अदालत ने यह स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है.

गृह विभाग और DGP को हलफनामा देने का निर्देश

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वे मामले में विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करें. अदालत ने अधिकारियों से पूछा है कि महिला न्यायाधीश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं और भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या योजना है.

गौहत्या प्रकरण के फैसले के बाद शुरू हुआ विवाद

ये पूरा मामला सिवनी मालवा में पदस्थ न्यायाधीश तबस्सुम खान से जुड़ा है. उन्होंने 12 जून 2026 को गौहत्या से संबंधित एक मामले में 14 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. फैसले के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ टिप्पणियां और कथित धमकी भरे संदेश प्रसारित होने लगे. इसी घटनाक्रम को देखते हुए मामला न्यायपालिका और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया.

सरकार ने अदालत को बताई सुरक्षा व्यवस्था

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने अदालत को सुरक्षा संबंधी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि न्यायाधीश तबस्सुम खान की सुरक्षा के लिए 1-5 श्रेणी की सशस्त्र सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई है. साथ ही सोशल मीडिया पर प्रसारित आपत्तिजनक सामग्री और पोस्ट को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.

सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर

मामले में पुलिस और संबंधित एजेंसियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित सामग्री की भी निगरानी कर रही हैं. धमकी भरे संदेशों और आपत्तिजनक पोस्ट के स्रोतों का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

न्यायिक स्वतंत्रता और सुरक्षा का मुद्दा

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल एक न्यायाधीश की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से भी जुड़ा है. इसी वजह से हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार से जवाब मांगा है और सुरक्षा उपायों की जानकारी तलब की है.

अब सरकार के जवाब पर नजर

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी. अदालत यह देखेगी कि सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं. फिलहाल पूरे मामले पर न्यायपालिका, प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े महकमों की नजर बनी हुई है.

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