जिन पुराने मतदाताओं का नाम Voter List में नहीं है, वे बेझिझक फॉर्म-6 भर सकते हैं, EC ने जारी किया स्पष्टीकरण

चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 को लेकर फैली भ्रम की स्थिति पर बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग नेकहा है कि जिन पुराने मतदाताओं का नाम मसौदा मतदाता सूची में नहीं है, वे बेझिझक फॉर्म-6 भर सकते हैं और इसे झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा।

Nov 3, 2026 - 20:26
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जिन पुराने मतदाताओं का नाम Voter List में नहीं है, वे बेझिझक फॉर्म-6 भर सकते हैं, EC ने जारी किया स्पष्टीकरण

भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत फॉर्म-6 को लेकर फैली भ्रम की स्थिति पर बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने साफ कहा है कि जिन पुराने मतदाताओं का नाम मसौदा मतदाता सूची में नहीं है, वे बेझिझक फॉर्म-6 भर सकते हैं और इसे झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा। आयोग के संज्ञान में आया था कि SIR के दौरान प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कई पुराने मतदाताओं के नाम गायब हैं। ये मतदाता फॉर्म-6 भरने से डर रहे थे, क्योंकि फॉर्म-6 में एक घोषणा देनी होती है कि "मेरा नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल हो रहा है।"

चुनाव आयोग ने क्या कहा है?

पुराने मतदाताओं को लग रहा था कि अगर वे ये घोषणा देंगे तो यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत झूठा बयान होगा और उन पर मुकदमा चल सकता है।

फॉर्म-6 में पहली बार नाम शामिल होने वाली घोषणा 01.08.2022 से लागू है।

 जिसका नाम ड्राफ्ट रोल में नहीं है, उसे SIR के तहत या उसके बाद नए सिरे से फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वाना ही होगा, चाहे वह पहले कितनी भी बार वोटर रहा हो।

ऐसी स्थिति में फॉर्म-6 भरना झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा, सिर्फ इसलिए कि मतदाता पहले नामांकित था।

चुनाव आयोग ने क्या बताई शर्त

आयोग ने साफ निर्देश दिया है कि किसी भी ERO (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) द्वारा सिर्फ इस आधार पर धारा 31 के तहत कोई केस नहीं किया जाएगा कि मतदाता पहले से लिस्ट में था और उसने फिर से फॉर्म-6 भरा है। शर्त सिर्फ इतनी है कि उसका नाम किसी दूसरी लोकसभा या विधानसभा सीट पर पहले से न हो।

दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद दी राहत

यह स्पष्टीकरण दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले निलोत्पल दत्ता बनाम चुनाव आयोग (W.P. No. 14955/2026, फैसला 14.10.2026) के अनुरूप है। कोर्ट ने भी कहा था कि पहली बार वोटर न होने वाले व्यक्ति का फॉर्म-6 भरना झूठी घोषणा नहीं है और मतदाताओं का डर गलत है। आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिया है कि इस स्पष्टीकरण का स्थानीय भाषाओं में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपना नाम जुड़वाने से वंचित न रह जाए।

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