30 मार्च तक इस्तीफा नहीं दिया तो भी नहीं जाएगी नीतीश, नितिन नवीन की राज्यसभा सदस्यता; जानें 14 दिन का नियम
2004 में लोकसभा सांसद बने नीतीश कुमार ने 20 मार्च 2006 को विधान पार्षद बनने के 56 दिन बाद संसद सदस्यता से इस्तीफा दिया था. इसकी वजह भी यही 14 दिन वाला नियम था.
बिहार में राज्यसभा चुनाव के बाद चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को 30 मार्च तक बिहार विधानमंडल की सदस्यता छोड़नी होगी. अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनकी राज्यसभा की सदस्यता चली जाएगी. इसके लिए संवैधानिक व्यवस्था और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला दिया जा रहा है. यहां तक कि बिहार में मंत्री श्रवण कुमार ने भी कहा कि नीतीश कुमार को 14 दिनों में अपनी सदस्यता छोड़नी होगी. इस हिसाब से नीतीश को 30 मार्च तक इस्तीफा देना होगा. कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की लोकसभा सदस्यता भी इसी आधार पर रद्द हो हुई थी. हालांकि पूरे मामले की पड़ताल करने पर यह साफ हुआ है कि नीतीश कुमार और नितिन नवीन 30 मार्च तक विधानमंडल की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए बाध्य नहीं हैं.
क्या है 14 दिनों का नियम?
पूरे मामले में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101(2) का जिक्र आ रहा है. इसके तहत यह प्रावधान है कि कोई व्यक्ति एक ही समय में संसद (लोकसभा/राज्यसभा) और राज्य के विधानमंडल (विधानसभा/विधानपरिषद) दोनों का सदस्य नहीं हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो उसे एक निश्चित समयसीमा के अंदर एक सदन से त्यागपत्र देना होगा. समयसीमा का निर्धारण राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम से तय होगा. इसकी समयसीमा प्रोहिबिशन ऑफ सिमुल्टेनियस मेंबरशिप रूल्स 1950 में तय की गई है. इस नियम के तहत दो सदनों के सदस्य निर्वाचित होने की स्थिति में व्यक्ति को 14 दिनों के अंदर अपना पद छोड़ना होगा.
नीतीश को कब तक देना होगा इस्तीफा?
सारा पेच इसी 14 दिन में है. ये 14 दिन कब से गिने जाएंगे? क्या चुनाव नतीजों की घोषणा से या फिर परिणाम का केंद्रीय या राज्य गजट में प्रकाशन की तारीख से? निर्वाचन की तारीख और गजट का प्रकाशन का समय अलग-अलग होता है. नियम कहता है कि कोई भी व्यक्ति गजट नोटिफिकेशन के 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देने के लिए बाध्य होता है, न कि निर्वाचन की तारीख से. राज्यसभा चुनाव के परिणामों का गजट प्रकाशन अब तक नहीं हुआ है, ऐसे में नीतीश कुमार पर विधान परिषद की सदस्यता त्यागने की बाध्यता फिलहाल नहीं है.
2006 में 56 दिन बाद दिया था इस्तीफा
2004 के आम चुनाव में नीतीश कुमार बिहार की नालंदा सीट से चुनाव जीते थे. उन्होंने लोजपा के कुमार पुष्पंजय को 1 लाख 3 हजार वोट से चुनाव हराया था. लेकिन उसके अगले साल हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को जीत मिली और वह मुख्यमंत्री बने. इसके बाद 20 मार्च 2006 को वह बिहार विधान परिषद के सदस्य बने. विधान परिषद के सदस्य बनने पर उन्होंने 15 मई 2006 को लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. यानी विधान परिषद में अपने निर्वाचन के 56 दिन बाद उन्होंने लोकसभा की सदस्यता छोड़ी थी. यह गजट के देरी से प्रकाशन के कारण ही संभव हुआ था.
अजीत जोगी को गंवानी पड़ी थी लोकसभा सदस्यता
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी 14वीं लोकसभा के दौरान महासमुंद सीट से सांसद थे. 2008 में छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए हुए चुनाव में वह मारवाही सीट से चुनाव जीते. हालांकि विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भी उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया. चुनाव परिणाम की घोषणा 8 दिसंबर को हुई थी और गजट का प्रकाशन 11 दिसंबर को हुआ था. ऐसे में उनकी सदस्यता 26 दिसंबर को रद्द कर दी गई थी.
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