CBSE ने कक्षा 6 से तीसरी भाषा (R3) को किया अनिवार्य , स्कूलों को 7 दिनों के भीतर इसे लागू करने को कहा

CBSE ने कक्षा 6 से स्कूलों में तीसरी भाषा (R3) को पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है. अब स्कूलों को 7 दिन में इसे लागू करना होगा.

Apr 9, 2026 - 16:54
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CBSE ने कक्षा 6 से तीसरी भाषा (R3) को किया अनिवार्य , स्कूलों को 7 दिनों के भीतर इसे लागू करने को कहा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत एक बड़ा फैसला लिया है. अब कक्षा 6 के छात्रों के लिए 'तीसरी भाषा' (R3) को अनिवार्य कर दिया है. बोर्ड द्वारा जारी हालिया सर्कुलर के अनुसार, सभी संबद्ध स्कूलों को इस आदेश को अगले 7 दिनों के भीतर प्रभावी ढंग से लागू करने का सख्त निर्देश दिया गया है.

'स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा 2023' (NCF-SE) पर आधारित इस पहल का उद्देश्य छात्रों में भाषाई कौशल, सांस्कृतिक समझ और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि भले ही अभी ऑफिशियल सिलेबस उपलब्ध न हों, लेकिन शिक्षण कार्य तुरंत शुरू करना अनिवार्य है.

CBSC के सर्कुलर में क्या?

स्कूलों से कहा गया है कि वे तुरंत पढ़ाना शुरू कर दें, भले ही पाठ्यपुस्तकें अभी जारी न हुई हों.

सर्कुलर में सभी संबद्ध स्कूलों के लिए इस शुरुआत को बेहद जरूरी और अनिवार्य बताया गया है.

R3 कक्षाओं के लिए स्थानीय रूप से उपलब्ध अध्ययन सामग्री के अस्थायी उपयोग की अनुमति दी गई है.

स्कूलों को क्षेत्रीय कार्यालयों को सूचित करना होगा और OASIS पोर्टल पर भाषा के चयन को अपडेट करना होगा.

कक्षा 6 में शुरू की गई भाषाएं ही कक्षा 9th और 10th में विकल्प के रूप में उपलब्ध होंगी.

CBSE के क्षेत्रीय अधिकारी इस शुरुआत की निगरानी करेंगे और इसे लागू करने से जुड़ा डेटा इकट्ठा करेंगे.

क्या है त्रिभाषा (R3) मॉडल?

तीसरी भाषा (R3) मॉडल राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) का हिस्सा है, जिसके तहत कक्षा 6 से 10 तक के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा. इस मॉडल की सबसे जरूरी शर्त यह है कि चुनी गई तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय मूल की भाषाएं (जैसे हिंदी, संस्कृत, मराठी आदि) होनी चाहिए, जबकि तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी या किसी अन्य विदेशी भाषा का चयन किया जा सकता है. इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों में बहुभाषावाद, सांस्कृतिक समझ और भाषाई कौशल को विकसित करना है, जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू कर 2031 की बोर्ड परीक्षा तक पूरी तरह प्रभावी बनाने की योजना है. 

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