MP के सागर में बनेंगी अत्याधुनिक गौशालाएं; 442 एकड़ भूमि आवंटित, ग्रामीणों को रोजगार

सागर जिले में 442 एकड़ भूमि पर अत्याधुनिक और स्वावलंबी गौशालाएं बनेंगी. आवारा मवेशियों को आश्रय और ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा.

Mar 16, 2026 - 17:49
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MP के सागर में बनेंगी अत्याधुनिक गौशालाएं; 442 एकड़ भूमि आवंटित, ग्रामीणों को रोजगार

मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) द्वारा सड़कों पर घूमने वाले आवारा मवेशियों (Stray Cattle) की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक अहम पहल की जा रही है. राज्य सरकार (MP Government) अब अत्याधुनिक (Hitech Gaushala) और स्वावलंबी गौशालाओं के निर्माण की दिशा में तेजी से काम कर रही है. इसी क्रम में सागर जिले में दो स्थानों पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त गौशालाओं का निर्माण किया जाएगा. इस योजना को लेकर पशुपालन (Animal Husbandry Department MP) एवं डेयरी विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं.

442 एकड़ भूमि का हुआ आवंटन

जानकारी के अनुसार सागर जिले में प्रस्तावित इन गौशालाओं के निर्माण के लिए करीब 442 एकड़ भूमि का आवंटन किया गया है. प्रशासन की योजना है कि इन गौशालाओं को केवल पशुओं के आश्रय स्थल तक सीमित न रखकर एक समग्र पशुधन विकास केंद्र के रूप में विकसित किया जाए. इनका निर्माण इस तरह किया जाएगा कि ये गौशालाएं अपने संचालन के लिए आवश्यक संसाधन स्वयं उत्पन्न कर सकें.

बीना और जैसीनगर में बनेंगी गौशालाएं

प्राप्त जानकारी के अनुसार सागर जिले की बीना और जैसीनगर तहसील में इन अत्याधुनिक गौशालाओं का निर्माण किया जाएगा. यहां बड़ी संख्या में दुधारू और अन्य पशुओं को रखने की व्यवस्था की जाएगी. इससे सड़कों पर घूमने वाले आवारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय मिलेगा और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है. साथ ही दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है.

चारा उत्पादन और बायोगैस की व्यवस्था

सरकार की योजना के तहत गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए परिसर में ही भूसा और हरा चारा उत्पादन की यूनिट स्थापित की जाएगी. इससे पशुओं के लिए चारे की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित होगी. अतिरिक्त चारा उत्पादन से आय का नया स्रोत भी विकसित किया जा सकेगा. इसके अलावा पशुओं से प्राप्त गोबर का उपयोग बायोगैस उत्पादन में किया जाएगा. बायोगैस से ऊर्जा तैयार कर गौशालाओं के संचालन में इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि इससे निकलने वाला अवशेष जैविक खाद के रूप में उपयोग होगा.

स्वावलंबी गौशाला कामधेनु निवास 2025' नीति लागू

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा “स्वावलंबी गौशाला कामधेनु निवास 2025” नीति लागू की गई है. इस नीति का उद्देश्य आवारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ‑साथ गौशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है. सरकार चाहती है कि भविष्य में गौशालाएं केवल अनुदान पर निर्भर न रहें.

ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार

इन गौशालाओं के निर्माण और संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे. पशुओं की देखभाल, चारा उत्पादन, डेयरी गतिविधियों और अन्य कार्यों में आसपास के ग्रामीणों को रोजगार मिलने की संभावना है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

समस्या के समाधान की दिशा में अहम कदम

पशुपालन विभाग के उप संचालक वीके ठाकुर के अनुसार, इन गौशालाओं को पूरी तरह स्वावलंबी मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रदेश की अन्य गौशालाओं के लिए भी एक आदर्श मॉडल बनेगी. फिलहाल भूमि चिन्हांकन और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं. आने वाले समय में निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है.

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