NDPS मामले में MP के 96 पुलिसकर्मियों को कोर्ट से राहत, सेशन कोर्ट ने FIR पर लगाई 'रोक', दोबारा होगी सुनवाई
एनडीपीएस मामले में घिरे आगर मालवा थाना प्रभारी शशि उपाध्याय ने NDTV को बताया कि अपर सेशन न्यायालय ने एसीजेएम द्वारा पारित एफआईआर के आदेश को निरस्त कर दिया. दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के निर्देश दिए हैं.
आगर मालवा: एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस) मामले में आगर थाना प्रभारी सहित छह नामजद और करीब 90 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को अपर सेशन न्यायालय भवानीमंडी (राजस्थान) ने अपास्त कर दिया है. न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि आदेश पारित करने से पहले कानून में निर्धारित आवश्यक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया. कोर्ट ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए संबंधित न्यायालय को वापस भेज दिया गया है.
दरअसल, यह मामला 28 जनवरी 2026 का है, जब आगर मालवा पुलिस की टीम एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए राजस्थान के डग थाना क्षेत्र के घाटाखेड़ी गांव पहुंची थी. कार्रवाई के बाद हामिद खान ने न्यायालय में परिवाद दायर कर आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी तड़के उनके घर पहुंचे और दो युवकों को अपने साथ ले गए. बाद में उनके खिलाफ झूठा एनडीपीएस प्रकरण दर्ज कर दिया. परिवादी ने पुलिस पर अन्य गंभीर आरोप भी लगाए थे.
एपआईआर करने के दिए थे आदेश
परिवाद पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) चौमहला ने थाना प्रभारी शशि उपाध्याय सहित छह नामजद के अलावा करीब 90 पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच कराने के आदेश दिए थे. इस आदेश के खिलाफ संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपर सेशन न्यायालय में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की.
सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद अपर सेशन न्यायालय ने पाया कि लोक सेवकों के विरुद्ध इस प्रकार का आदेश पारित करने से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक था. न्यायालय ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों से तथ्यात्मक रिपोर्ट प्राप्त करने और संबंधित लोक सेवकों को सुनवाई का अवसर देने जैसे पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया.
आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया
न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि अधीनस्थ न्यायालय ने पहले पारित आदेश में मामले को अलग दृष्टिकोण से देखा था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद संशोधित आदेश जारी कर सीधे एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे दिए. सेशन कोर्ट ने माना कि इस परिवर्तन के संबंध में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और कारणों का समुचित पालन होना अपेक्षित था.
यह न्याय के सिद्धांत की जीत'
आगर मालवा थाना प्रभारी शशि उपाध्याय ने NDTV को फोन पर बताया कि सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अपर सेशन न्यायालय ने एसीजेएम द्वारा 11 जून और 15 जून 2026 को पारित दोनों आदेशों को निरस्त कर दिया. साथ ही निर्देश दिए कि दोनों पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर प्रदान करते हुए कानून के अनुरूप नए सिरे से आदेश पारित किया जाए. उन्होंने कहा, "यह न्याय के सिद्धांत की जीत है. आगर मालवा पुलिस की कार्रवाई कानून के दायरे में नियमानुसार की गई थी."
दोबारा भी ऐसा ही आदेश आएगा
फरियादी हामिद खान के अधिवक्ता इकबाल खान ने कहा- निचली अदालत में जो आदेश पारित हुए थे, वे न्याय के तमाम पहलुओं पर खरे उतरते हैं. अपर सेशन कोर्ट ने मामले में एफआईआर के आदेश को अपास्त करने की बात कही है, यानी आदेश को अभी एक तरफ रख दिया गया है, निरस्त नहीं किया है. माननीय न्यायालय ने दोनों पक्षों को दोबारा सुनने के बाद आदेश पारित करने की बात कही है. जब भी आगे आदेश आएगा, वह पुनः इसी प्रकृति का आएगा. आगर मालवा पुलिस के छह नामजद अधिकारियों और करीब 90 अन्य पुलिस कर्मचारियों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर का अस्तित्व समाप्त नहीं हुआ है, वह अभी यथावत है. हम कानून और न्याय में विश्वास करते हैं.
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