कोर्ट को कोई कोई डरा धमका नहीं सकता', दिल्ली प्रोटेस्ट पर SC में आज क्या क्या हुआ, 10 प्वाइंट्स में जानें
सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के खिलाफ दायर 22 याचिकाओं पर सुनवाई की और नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने टिप्पणी की कि "कोई भी कोर्ट को डरा धमका नहीं सकता।" 10 प्वाइंट्स में जानें आज क्या क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट में आज दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा। इसी दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर भी चर्चा हुई। वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक जुलूस निकाले जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह अस्वीकार्य है। उन्होंने इसे न्यायपालिका को डराने-धमकाने और उस पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता।
कोर्ट में आज क्या क्या हुआ जानें 10 प्वाइंट्स में
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं की ओर से दायर एक याचिका पर भारतीय निर्वाचन आयोग और अन्य को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से जवाब मांगा है।
विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिला पत्रकारों के साथ पुलिस की कथित बदसलूकी और मारपीट के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता दिखाई और कोर्ट ने संकेत दिया कि इन आरोपों की सुनवाई और जांच के लिए एक कमेटी गठित की जा सकती है। इस मामले में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह से जरूरी दस्तावेज दो सीलबंद लिफाफों में पेश करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने के खिलाफ दायर एक याचिका पर राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया और साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि कोई भी न्यायपालिका पर दबाव नहीं डाल सकता।
सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन पर पाबंदियों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के आचरण पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्हें इस पर स्पष्टीकरण देना होगा। कपिल सिब्बल ने बताया कि वह फिलहाल राहुल गांधी की ओर से पेश हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह और AIMIM सुप्रीमो असद्दुदीन ओवैसी की याचिका पर नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट में विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों पर हमले के मुद्दे पर सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि टेक्नोलॉजी के इस दौर में, मोबाइल रखने वाला कोई भी व्यक्ति पत्रकार बन सकता है। कई लोग माइक लेकर कहते हैं कि वे रिकॉर्डिंग कर रहे हैं और फिर उसे रील के तौर पर अपलोड कर देते हैं। हमें पता नहीं चलता कि कौन रील बनाने वाला है और कौन स्वतंत्र पत्रकार। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से महिला पत्रकारों पर किए गए हमले के आरोपों की सुनवाई और जांच के लिए एक समिति का गठन करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को दिल्ली में हुए प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। वहीं, जंतर-मंतर को डिनोटिफाई किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या यह फैसला कोर्ट की कुछ मौखिक टिप्पणियों की वजह से लिया गया था या फिर इसे आम प्रदर्शन स्थल के रूप में इस्तेमाल करने की उपयोगिता पर विचार करने के बाद लिया गया था। इसपर, SG मेहता ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस निर्णय का आधार नहीं है। कमेटी का गठन बहुत पहले ही कर दिया गया था और कमेटी ने एक विस्तृत रिपोर्ट दी है।
मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि महिला पत्रकार को गिरफ्तार न किया जाए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि अगर महिला पत्रकार जांच में शामिल होती है, तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। जांच में शामिल होने की शर्त और अदालत के निर्देश के बीच आगे की प्रक्रिया का पालन संबंधित एजेंसियों को करना होगा। CJI ने कहा कि बोलने की आजादी के आड़ में अगर हर कोई पत्रकार बनने लगे तो समस्या उत्पन्न हो जाती है।
दिल्ली विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस अदालत के सामने हर आवाज़ कीमती है और सबकी बात सुनी जाएगी। गृह मंत्रालय, दिल्ली मेट्रो और दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल हलफनामों का सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया। काउंटर एफिडेविट दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई।
एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के 13 नेताओं की अर्जी, मेट्रो बंदी और पुलिस कार्रवाई, SIR रद्द करने को लेकर असदुद्दीन ओवैसी की याचिका और विपक्ष के SC दौरे के दौरान हंगामा के मामले में सभी जुड़े पक्षों को नोटिस जारी करने के साथ ही कोर्ट में आज की सुनवाई पूरी हो गई है।
कोर्ट ने अगली तारीख के बारे में कुछ नहीं कहा है। बाद में सभी मामलों पर लिखित आदेश आने की संभावना है। एसआईआर से जुड़ी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी, जबकि प्रदर्शन पर पाबंदियों से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई अलग होगी।
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