बिजली संकट से जूझ रहा मध्य प्रदेश, गांवों में बढ़ा अंधेरा; पंजाब से बिजली खरीदने की तैयारी
इस बिजली तहत सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती की जाती है उसके बाद तहसील मुख्यालय फिर जिला स्तर और अंत में बड़े शहरों को प्रभावित किया जाता है.
मध्य प्रदेश में बिजली संकट ने ग्रामीण इलाकों की परेशानी बढ़ा दी है. खेती के महत्वपूर्ण समय में कई गांवों में घंटों बिजली नहीं मिल रही है जिससे सिंचाई प्रभावित हो रही है और किसानों की चिंता बढ़ गई है. जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार शिकायतें मिलने के बाद राज्य सरकार ने अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था के लिए पंजाब से बिजली खरीदने का फैसला किया है.
सरप्लस बिजली के दावे के बीच क्यों पैदा हुआ संकट?
मध्य प्रदेश को अक्सर सरप्लस बिजली वाला राज्य बताया जाता रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर अचानक हालात इतने खराब कैसे हो गए. जानकारी के अनुसार प्रदेश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है जबकि उत्पादन और उपलब्धता उसी अनुपात में नहीं बढ़ सकी. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है जहां कई जगह लंबे समय तक बिजली कटौती हो रही है.
विशेषज्ञ ने बताई वजह
बिजली विभाग के एक सेवानिवृत्त अधिकारी के मुताबिक इस संकट की मुख्य वजह बढ़ा हुआ लोड है. उनका कहना है कि सरकार इतनी अधिक मांग के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थी. कम बारिश के कारण कई इलाकों में बिजली की खपत अचानक बढ़ गई. दूसरी ओर सोलर और विंड एनर्जी से अपेक्षित बिजली उत्पादन नहीं मिल पाया. हालांकि उनका मानना है कि अगले एक सप्ताह से दस दिनों के भीतर हालात सामान्य हो सकते हैं.
विशेषज्ञ के अनुसार बिजली कटौती के लिए सरकार रोटेशन व्यवस्था लागू करती है. इसके तहत सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती की जाती है उसके बाद तहसील मुख्यालय फिर जिला स्तर और अंत में बड़े शहरों को प्रभावित किया जाता है.
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बिजली संकट को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई गांवों में दिनों तक बल्ब नहीं जल रहे हैं और पूरी बिजली व्यवस्था बदहाल दिखाई दे रही है. पटवारी ने सवाल उठाया कि जब मध्य प्रदेश दूसरे राज्यों और दिल्ली मेट्रो को बिजली बेचता है तो फिर गांवों में अंधेरा क्यों है. उन्होंने बिजली मंत्री की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि आम जनता बिजली संकट से परेशान है जबकि सरकार समाधान देने में नाकाम साबित हो रही है.
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