मध्य प्रदेश की सबसे लंबी नदी, राज्य को दो हिस्सों में बांटकर संस्कृति को देती है नया आकार

नर्मदा नदी मध्य प्रदेश की सबसे लंबी नदी है. यह अमरकंटक से निकलने के बाद पश्चिम की तरफ बहती है और फिर गुजरात से होते हुए अरब सागर में मिल जाती है. नर्मदा मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक धड़कन और उसकी आर्थिक रीढ़ है. इसके किनारे कई बड़े मंदिर मौजूद हैं और खेती के लिए इसका पानी बहुत ही अहम है. नर्मदा सदियों से इस भूभाग की सभ्यता और संस्कृति गाथा लिखती आ रही है.

Oct 13, 2026 - 17:40
 0  10
मध्य प्रदेश की सबसे लंबी नदी, राज्य को दो हिस्सों में बांटकर संस्कृति को देती है नया आकार

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून

पानी गए न ऊबरे, मोती, मानुष, चून

ऊपर लिखा दोहा महान कवि रहीम ने लिखा था, जिसमें वह यह बताना चाहते थे कि बिना पानी के कुछ भी संभव नहीं है और पानी बहुत ही जरूरी है. शायद इसी वजह से पुरानी जितनी भी सभ्यताएं नदियों के किनारे ही जन्मी. वेद भी नदियों के किनारे लिखे गए. आज भी पानी जीवन के लिए बहुत ही जरूरी है. मध्य प्रदेश देश के बीचों-बीच मौजूद है और इसे नदियों का मायका कहा जाता है, क्योंकि यहां पर 200 से ज्यादा छोटी और बड़ी नदियां निकलती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश की सबसे लंबी नदी है कौन सी है. अगर नहीं, तो यह खबर बिल्कुल आपके लिए ही है.

नर्मदा मध्य प्रदेश की सबसे लंबी नदी है. नर्मदा मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक में मैकल पर्वतमाला से निकलती है. बताया जाता है कि जहां से नर्मदा नदी निकलती है. वह स्थान गाय के मुंह जैसे आकार का है. जहां नर्मदा उद्दगम स्थल है. वहां एक नर्मदा का मंदिर भी है. बाद के समय में महारानी देवी अहिल्या ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था.

पश्चिम दिशा की ओर बहती है नर्मदा नदी

अमरकंटक से निकलने के बाद नर्मदा नदी पश्चिम दिशा की ओर बहती है. इसके बाद वह मंडला पहुंचती है और फिर यहां से जबलपुर जाती है. यहीं पर धुआंधार वॉटरफॉल मौजूद है. जबलपुर शहर नर्मदा के किनारे आधुनिकता और प्राकृतिक सुंदरता का एक बेहतरीन संगम पेश करता है. फिर नर्मदा बेसाल्ट चट्टानों और सतपुड़ा रेंज के बीच से बहती हुई आगे बढ़ती है. फिर नर्मदा नरसिंहपुर और नर्मदापुरम पहुंचती है, जहां इसका घाट काफी चौड़ा और उपजाऊ है. बाद में यहीं पर इसमें तवा नदी आकर मिलती है.

नर्मदा नदी के किनारे मौजूद है ओंकारेश्वर घाट

खंडवा जिले में ओंकारेश्वर नर्मदा नटी के किनारे बहुत ही पवित्र और पुराना शहर है. यहां पर भगवान शिव का पूरे विश्व में प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग मौजूद है. खरगोन में महेश्वर नर्मदा के तट पर स्थित एक जीवंत विरासत है. यहां के भव्य घाट, किले और सूती साड़ियों की बुनाई का हुनर नर्मदा की लहरों के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है.

एमपी में कुल 1077 किलोमीटर बहती है नर्मदा नदी

इसके बाद नर्मदा नदी खरगोन, धार और बड़वानी को पार करती है. इसके बाद यह कुछ दूरी तक महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा बनाती है और आखिरी में गुजरात से होते हुए खंभात की खाड़ी (अरब सागर) में मिल जाती है. इस दौरान नर्मदा मध्य प्रदेश में 1077 किलोमीटर बहती है. यह पश्चिम दिशा की तरफ बहने वाली सबसे लंबी नदी भी है. यह मध्य प्रदेश के बिल्कुल बीचों बीच बहती है और राज्य को दो हिस्सों में बांट देती है.

संस्कृति को देती है नया आयाम

नर्मदा नदी मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी है. हिंदू धर्म में नर्मदा नदी को गंगा के समान ही पवित्र माना गया है. नर्मदा परिक्रमा का एक विशेष महत्व है. इसके किनारे बड़े मंदिर मौजूद हैं, जो सांस्कृति धरोहर को दिखाते हैं. खेती के पानी के लिए भी नर्मदा एक अहम भूमिका निभाती है. इसके पानी से ही किसानों के घर खुशहाली आती है. कई जिलों को नर्मदा से ही पाने का साफ पानी मिलता है.

नर्मदा मध्य प्रदेश के लिए सिर्फ एक बहता हुआ पानी नहीं, बल्कि विकास की धुरी और उसका सबसे खूबसूरत गहना है. इसकी बहती हुई धारा संस्कृति, प्रकृति और अर्थव्यवस्था को एक सूत्र में पिरोकर रखती है.

साभार