अगर चौथे समन के बाद भी पेश नहीं हुए अरविंद केजरीवाल तो ED के सामने क्या हैं विकल्प?
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले दो महीने में चार बार तलब किया है. केजरीवाल ने 3 जनवरी को लगातार तीसरी बार समन पर ईडी के सामने पेश होने से इनकार कर दिया.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले दो महीने में चार बार तलब किया है. केजरीवाल ने 3 जनवरी को लगातार तीसरी बार समन पर ईडी के सामने पेश होने से इनकार कर दिया. इतना ही नहीं उन्होंने समन को 'अवैध' भी बताया है. ईडी ने अब केजरीवाल को चौथा समन जारी कर 18 जनवरी को पेश होने के लिए कहा है. केजरीवाल चौथी बार भी निदेशालय के सामने पेश नहीं हुए तो क्या होगा? क्या पांचवा ईडी समन आएगा? केजरीवाल के पास चौथे समन से बचने की कोई संभावना बचेगी या नहीं? आइये समझने की कोशिश करते हैं कि अगर चौथे समन के बाद भी अरविंद केजरीवाल पेश नहीं हुए तो ED के सामने क्या विकल्प हैं?
केजरीवाल ने लगाए आरोप
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 3 जनवरी को को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश होना था. लेकिन केजरीवाल ने तीसरी बार ईडी के समन को नजरअंदाज कर दिया. 'आप' के मुताबिक केजरीवाल ईडी के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन एजेंसी का नोटिस गैरकानूनी है. उनका इरादा अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करने का है. वे उन्हें चुनाव प्रचार से रोकना चाहते हैं.
ईडी ने जारी किया चौथा समन
केजरीवाल ने ईडी के तीसरे समन को मानने से इनकार कर दिया है, इसलिए उन्हें चौथा समन भेजा गया है. चौथे समन पर केजरीवाल ईडी के सामने पेश नहीं हुए तो ईडी उनके खिलाफ कोर्ट जाएगी. ईडी केजरीवाल के खिलाफ कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी करा सकती है.
जारी हो सकता है गैर जमानती वारंट
धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) नियमों के प्रावधानों के अनुसार कोई व्यक्ति केवल तीन बार ही ईडी के समन को इनकार कर सकता है. चौथी बार समन को नजरअंदाज करने की स्थिति में ईडी के पास अदालत से गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) मांगने की शक्ति और विकल्प है. वारंट जारी हुआ तो संबंधित व्यक्ति को कोर्ट के सामने मजबूरन पेश होना ही पड़ेगा. यदि व्यक्ति फिर भी विरोध करता है और कोर्ट के सामने पेश नहीं होता है, तो उसे गिरफ्तार किया जा सकता है और फिर अदालत में लाया जा सकता है.
न्यायाधीश, जूरी और जल्लाद'
बता दें कि आम आदमी पार्टी (आप) संयोजक केजरीवाल (55) ने राज्यसभा चुनाव और गणतंत्र दिवस की तैयारियों का हवाला देते हुए तीन जनवरी को तीसरी बार ईडी के सामने पेश होने से इनकार कर दिया था. उन्होंने समन पर कानूनी ‘आपत्तियों’ का हवाला देते हुए और एजेंसी पर 'न्यायाधीश, जूरी और जल्लाद' की भूमिका निभाने का आरोप लगाते हुए ईडी की कार्रवाई के पीछे के मकसद पर भी सवाल उठाया था. ईडी ने नया नोटिस जारी करके केजरीवाल की इस दलील को फिर से खारिज कर दिया है कि उन्हें जारी किए गए समन 'कानून सम्मत नहीं थे' और इसलिए इसे वापस लिया जाना चाहिए.
आरोपों का बार-बार खंडन
माना जा रहा है कि ईडी इस मामले में एक नया पूरक आरोप पत्र दायर करेगी और आप को आबकारी नीति के माध्यम से उत्पन्न कथित रिश्वत के ‘लाभार्थी’ के रूप में आरोपित कर सकती है. आरोप है कि शराब व्यापारियों को लाइसेंस देने संबंधी दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति में घोर खामियां थीं और इसके जरिए कुछ डीलर का पक्ष लिया गया जिन्होंने कथित तौर पर इसके लिए रिश्वत दी थी. आप ने इन आरोपों का बार-बार खंडन किया है. बाद में इस नीति को रद्द कर दिया गया और दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) जांच की सिफारिश की जिसके बाद ईडी ने पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया.
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