खतरे में MP! प्रदेश की 'लाइफ लाइन' हुई प्रदूषित, NGT ने लगाई सरकार को फटकार
मध्य प्रदेश की लाइफ लाइन मानी जाने वाली नर्मदा नदी प्रदूषित हो रही है. इसे लेकर NGT सख्त हो गई है और राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.
मध्य प्रदेश की नदियों में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है. ऐसे में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने चिंता जताते हुए सरकार को फटकार लगाई है. एमपी की लाइफ लाइन मानी जाने वाली नर्मदा नदी समेत अन्य नदियां प्रदूषित हो गई हैं. ऐसे में एक याचिका के जरिए NGT ने राज्य सरकार से नर्मदा को प्रदूषित करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है.
सरकार को लगाई फटकार
NGT की सेंट्रल बैंक ने नर्मदा सहित अन्य नदियों में प्रदूषण को लेकर चिंता जाहिर की है. NGT ने यह भी कहा है कि पर्यावरणीय मापदंडों के उल्लंघन को उतनी गंभीरता से लेने की आवश्यकता है जितनी की हत्या और हमलों के अपराधों को रोकना.
याचिका पर हुई सुनवाई
एक याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा कि नदियों में अनुपचारित सीवेज मिलने से रोकना होगा. दरअसल, याचिका में गंभीर प्रदूषण पैदा करने और नदी में अनुपचारित सीवेज को रोकने में विफल रहने के लिए राज्य और अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी.
अतिक्रमण हटाने के निर्देश
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से कहा गया कि जल निकायों पर कोई अतिक्रमण नहीं होना चाहिए. नदी किनारों का सीमांकन होना चाहिए. यदि अतिक्रमण होता है तो आवश्यक कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम भी लागू किया जाए. उपचारित पानी का उपयोग बागवानी, कृषि, औद्योगिक या किसी अन्य उद्देश्य के लिए करना चाहिए. इसके अलावा ट्रिब्यूनल ने संयुक्त समिति की सिफारिश को भी स्वीकार किया है. ट्रीटमेंट वाले पानी को नदी में नहीं छोड़े जाने की बात भी कही है.
NGT ने कान्ह-सरस्वती नदी में बहने वाली गंदगी और इसमें स्वच्छ पानी के बहाव के लिए भी अलग-अलग समय पर आदेश जारी किए हैं.NGT ने नदी में बहाए जाने वाले केमिकल और गंदे पानी की रोकथाम पर भी दिशा-निर्देश दिए, जिस पर कार्रवाइयां जारी हैं.
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