चंबल में शांति लाने वाले IPS राजेंद्र चतुर्वेदी का निधन, SP रहते फूलन देवी और मलखान सिंह का कराया था सरेंडर
आईपीएस राजेंद्र चतुर्वेदी का निधन हो गया है, जिन्होंने पूर्व डकैत मलखान सिंह, फूलन देवी और घंसा बाबा को आत्मसमर्पण कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वह मध्य प्रदेश कैडर के 1969 बैच के आईपीएस अधिकारी थे और भिंड, ग्वालियर और छतरपुर में एसपी के रूप में काम कर चुके थे.
डाकू फूलन देवी, मलखान सिंह और घंसा बाबा को सरेंडर कराने वाले आईपीएस राजेंद्र चतुर्वेदी (Former IPS Rajendra Chaturvedi) का निधन हो गया. भारतीय पुलिस सेवा से निवृत्त आईपीएस राजेंद्र चतुर्वेदी उस समय भिंड के एसपी थी, जब पूर्व डकैत मलखान सिंह, फूलन देवी और घंसा बाबा ने आत्मसमर्पण किया था. उस दौरान आईपीएस चतुर्वेदी ने इनका समर्पण कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
राजेन्द्र चतुर्वेदी मध्य प्रदेश कैडर के 1969 बैच के आईपीएस अधिकारी थे. उन्होंने मध्य प्रदेश के पूर्व डकैत मलखान सिंह और फूलन देवी को आत्म समर्पण कराने में अहम भूमिका निभाई थी. वे भिंड ग्वालियर और छतरपुर एसपी रहे. एमपी के जेल महानिदेशक भी रहे थे. उन्होंने 7 दिसंबर को रात 11 बजे रांची (झारखंड) के अस्पताल में अंतिम सांस ली
आईपीएस चतुर्वेदी अस्सी के दशक में मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित आईपीएस अधिकारी थे. मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कार्यकाल में जब चंबल में डाकू समस्या चरम पर थी, तब भिंड एसपी के रूप में चतुर्वेदी ने पहले मलखान सिंह और फिर फूलन और घंसा बाबा गैंग का आत्म समर्पण कराकर चंबल में शांति लाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी. 1982 में आत्मसमर्पण करने से पहले मलखान सिंह दो दशकों तक राज्य के चंबल क्षेत्र में एक खूंखार डाकू के रूप में जाने जाते थे.
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