प्लेन हाईजैक होने पर सबसे पहले किस फोर्स को बुलाया जाता है? जान लीजिए जवाब
अगर भारत में कोई प्लेन हाईजैक होता है. तो सबसे पहले किस फोर्स को बुलाया जाएगा है. चलिए बताते हैं. इसका जवाब.
प्लेन हाईजैक की घटना काफी बड़ी घटना होती है. किसी भी देश की सरकार के लिए काफी परेशानियां खड़ी हो जाती है. दुनिया के तमाम देशों में प्लेन हाईजैक की घटनाएं देखने को मिली. है भारत भी इस परेशानी से अछूता नहीं रहा है. भारत में भी प्लेन हाईजैक की घटनाएं देखने को मिली है.
इनमें सबसे बड़ा था IC-814 कंधार हाईजैक. जिसमें इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट नंबर 814 को आतंकवादियों द्वारा हाईजैक किया गया था. यह भारत में हुई अब तक की सबसे बड़ी और आखिरी हाईजैक की घटना थी. कई लोगों के मन में सवाल भी आता है कि अगर कोई प्लेन हाईजैक होता है. तो सबसे पहले किस फोर्स को बुलाया जाता है. चलिए बताते हैं इसका जवाब.
प्लेन हाईजैक होने पर सबसे पहले कौन सी फोर्स आएगी?
किसी भी देश का प्लान हाईजैक होना. एक नेशनल क्राइसिस कहा जाता है. भारत में अगर कोई इस तरह की घटना होती है तो सबसे पहले नेशनल सिक्योरिटी गार्ड यानी एनएसजी को बुलाया जाता है. एनएसजी के कमांडो को ब्लैक कैट कमांडो भी कहा जाता है. इसके बाद एनएसजी को एक प्लान तैयार करने के लिए कहा जाता है. जिसमें वह प्लेन हाईजैक करने वाले हैं. अपराधियों को पकड़ने करने और प्लेन में मौजूद यात्रियों को रेस्क्यू करने का प्लान तैयार करते हैं. इसके अलावा दूसरे लेवल पर भी सरकार काम करती रहती है.
तैयार किया जाता स्पेशल एक्शन ग्रुप
प्लेन हाईजैक की घटना होने पर एयरपोर्ट सिविल एविएशन मंत्रालय को सूचना पहुंचाई जाती है. तो वहीं सिविल एविएशन मंत्रालय की ओर गृह मंत्रालय तक सूचना भेजी जाती है इसके बाद गृहमंत्री नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के साथ मिलकर स्पेशल एक्शन ग्रुप तैयार करते हैं. जिसमें एनएसजी ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार करती है. जिसमें रेस्कयू से लेकर हाईजैकर्स को पकड़ना या मारना तक शामिल होता है.
इन फोर्सेेज की भी ली जाती है मदद
एनएसजी के अलावा एयरपोर्ट पर मौजूद सीआईएसएफ फोर्स, उस राज्य की स्थानीय पुलिस और अगर फ्लाइंग ऑपरेशन सपोर्ट की जरूरत हुई तो भारतीय वायुसेना की भी मदद ली जाती है. इसके अलावा प्लेन हाईजैकिंग का मामला अगर इंटरनेशनल हाईजैकिंग का है. तो फिर भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एनालिसिस विंग (R&AW) यानी रॉ को भी इंवॉल्व किया जाता है.
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