बरगी क्रूज हादसे के बाद नावों पर रोक; ग्वारीघाट-भेड़ाघाट में सैकड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी पर संकट

बरगी बांध क्रूज हादसे के बाद जबलपुर में नर्मदा नदी के पर्यटन स्थलों में नाव संचालन पर रोक. ग्वारीघाट-भेड़ाघाट में सैकड़ों परिवारों की आमदनी ठप.

May 9, 2026 - 17:24
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बरगी क्रूज हादसे के बाद नावों पर रोक; ग्वारीघाट-भेड़ाघाट में सैकड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी पर संकट

जबलपुर में बरगी बांध पर हुए क्रूज हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है. संभावित हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से नर्मदा नदी और अन्य जलधाराओं में नाव संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है. हालांकि यह फैसला सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक माना जा रहा है, लेकिन इसका सीधा असर उन सैकड़ों परिवारों पर पड़ा है जिनकी रोज़ी-रोटी नाव संचालन और उससे जुड़ी पर्यटन गतिविधियों पर निर्भर है. ग्वारीघाट और भेड़ाघाट जैसे प्रमुख धार्मिक‑पर्यटन स्थलों पर सन्नाटा पसरा है. नाव चालक और छोटे कारोबारी अब प्रशासन से सुरक्षा के साथ राहत की भी उम्मीद लगाए बैठे हैं.

हादसे के बाद प्रशासन एक्शन मोड में

बरगी बांध क्रूज हादसे के बाद जिला प्रशासन ने जल पर्यटन गतिविधियों की समीक्षा करते हुए कड़े कदम उठाए हैं. सुरक्षा मानकों की जांच, लाइसेंस, क्षमता और तकनीकी संसाधनों की कमी को देखते हुए नर्मदा सहित सभी वॉटर बॉडी में नाव संचालन पर तत्काल रोक लगा दी गई है.

आजीविका पर संकट

ग्वारीघाट और भेड़ाघाट में नाव चलाने वाले परिवार पीढ़ियों से इसी पेशे से जुड़े हैं. गर्मी और पर्यटन सीजन में यही समय उनकी सालभर की कमाई का बड़ा हिस्सा तय करता है. नाव संचालन बंद होने से उनके सामने सीधा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.

घाटों पर पसरा सन्नाटा

जहां कभी सुबह से शाम तक पर्यटकों की रौनक रहती थी, वहीं अब घाटों पर सन्नाटा है. नाव चालक रोज़ सुबह घाट पर पहुंचते हैं, लेकिन दिनभर इंतजार के अलावा कुछ नहीं बचता. उम्मीद यही है कि प्रशासन कोई रास्ता निकाले.

छोटे व्यापारियों पर भी असर

नाव पाबंदी का असर केवल नाव चालकों तक सीमित नहीं है. घाटों पर प्रसाद, फूल‑माला, चाय‑नाश्ता बेचने वाले, ऑटो और टैक्सी चालक भी बेरोजगारी जैसे हालात में पहुंच गए हैं. उनकी आमदनी लगभग शून्य हो चुकी है.

'सुरक्षा जरूरी, लेकिन पूरी रोक गलत'

नाव चालकों का कहना है कि वे सुरक्षा नियमों के पालन के लिए तैयार हैं जैसे लाइफ जैकेट, सीमित सवारी और नियमित जांच स्वीकार्य है, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध से उनके परिवार भूख के कगार पर पहुंच रहे हैं.

अब संतुलन की दरकार

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुरक्षा और आजीविका के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए. स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि कड़े नियमों और निगरानी के साथ सीमित नाव संचालन की अनुमति दी जाए, ताकि हादसे भी न हों और सैकड़ों परिवारों की जिंदगी भी पटरी पर बनी रहे.

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