ब्रह्मांड की शुरुआत में प्रकाश कहां से आया? क्या भगवान ने स्विच दबाया? विज्ञान ने खोला रहस्य
ब्रह्मांड के शुरुआती दिनों में सिर्फ अंधकार व्याप्त था. फिर प्रकाश की उत्पत्ति कैसे हुई? एक नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने यह गुत्थी सुलझाने का दावा किया है.
ब्रह्मांड का शुरुआती समय अंधकार से भरा था. आखिरकार हमें पता चल गया है कि उस अंधकार और निराकार शून्य में प्रकाश कैसे आया. हबल और जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) के डेटा का इस्तेमाल कर फ्रेंच रिसर्चर्स ने पता लगाया कि मुक्त-उड़ान भरने वाले फोटॉन्स की उत्पत्ति बौनी आकाशगंगाओं में हुई थी. फरवरी में छपी स्टडी में, वैज्ञानिकों ने कहा इन फोटान्स ने अंतरिक्ष में भरे धुंधले हाइड्रोजन के कोहरे को साफ किया.
इंस्टीट्यूट डी एस्ट्रोफिजिक डी पेरिस' में एस्ट्रोफिजिसिस्ट इरीना चेमेरिंस्का ने कहा, 'यह खोज प्रारंभिक ब्रह्मांड के विकास में अति-मंद आकाशगंगाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है. वे आयनकारी फोटॉन पैदा करती हैं जो ब्रह्मांडीय पुनःआयनीकरण (reionization) के दौरान तटस्थ हाइड्रोजन को आयनित प्लाज्मा में बदल देते हैं. यह ब्रह्मांड के इतिहास को आकार देने में कम द्रव्यमान वाली आकाशगंगाओं को समझने की जरूरत जाहिर करता है.' चेमेरिंस्का की स्टडी 'नेचर' पत्रिका में छपी थी.
ब्रह्मांड में प्रकाश की उत्पत्ति कैसे हुई?
ब्रह्मांड की शुरुआत में, बिग बैंग के कुछ मिनटों के भीतर ही अंतरिक्ष आयनित प्लाज्मा के गर्म, घने कोहरे से भर गया था. जो थोड़ा बहुत प्रकाश था, वह इस कोहरे में प्रवेश नहीं कर सकता था. फोटॉन बस चारों ओर तैर रहे मुक्त इलेक्ट्रॉनों से बिखर गए होंगे, जिससे ब्रह्मांड वास्तविकता में अंधकारमय हो गया होगा. जैसे-जैसे ब्रह्मांड ठंडा हुआ, करीब तीन लाख साल बाद, प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों ने मिलकर तटस्थ हाइड्रोजन (थोड़ी मात्रा में हीलियम भी) बनाई.
प्रकाश की अधिकांश तरंगदैर्घ्यें (wavelengths) इस तटस्थ माध्यम में प्रवेश कर सकती थीं, लेकिन इसे उत्पन्न करने के लिए प्रकाश स्रोतों की कमी थी. लेकिन इसी हाइड्रोजन और हीलियम से पहले तारों का जन्म हुआ. उन पहले तारों से निकला रेडिएशन इतना शक्तिशाली था कि वे उनके नाभिक से इलेक्ट्रॉनों को अलग कर सके और गैस को आयनित कर सके.
हालांकि, तब तक ब्रह्मांड का विस्तार इतना हो चुका था कि गैस फैल चुकी थी और प्रकाश को बाहर आने से नहीं रोक सकती थी. बिग बैंग के लगभग 1 बिलियन साल बाद, ब्रह्मांड पूरी तरह से पुनः आयनित हो चुका था. यानी रोशनी जल चुकी थी. बिग बैंग के लगभग 1 बिलियन साल तक के समय को 'ब्रह्मांडीय भोर' या Cosmic Dawn कहा जाता है.
चूंकि ब्रह्मांडीय भोर में बहुत अधिक अंधकार है, और यह बहुत मंद और दूर है, इसलिए हमें यह देखने में परेशानी हुई कि वहां क्या है. JWST को ब्रह्मांडीय भोर में झांकने के लिए डिजाइन किया गया था. टेलीस्कोप ने जो कुछ देखा, उससे पता चलता है कि पुनःआयनीकरण में बौनी आकाशगंगाओं की महत्वपूर्ण भूमिका थी.
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