मध्य प्रदेश विधानसभा में घटती जा रही कांग्रेस विधायकों की संख्या, जीतू पटवारी की बढ़ रहीं मुश्किलें!

मध्य प्रदेश में जून 2026 में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है. इससे पहले कांग्रेस के विधायकों की संख्या कम होती जा रही है. इस मामले ने कांग्रेस और जीतू पटवारी की चिंता बढ़ा दी है.

Apr 3, 2026 - 16:28
 0  4
मध्य प्रदेश विधानसभा में घटती जा रही कांग्रेस विधायकों की संख्या, जीतू पटवारी की बढ़ रहीं मुश्किलें!

मध्य प्रदेश में बीते कुछ समय में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं. इस साल जून में राज्य में तीन सीटों पर राज्यसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले कांग्रेस की एक विधायक के बारे में माना जा रहा है कि वह भारतीय जनता पार्टी के साथ चलीं गईं हैं वहीं दो अन्य विधायकों में से एक वोट नहीं कर सकता है और तीसरे को तीन साल की सजा हो गई है. ऐसे में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती दिख रहीं हैं. 

वर्ष 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में 66 सीटें जीतने वाली कांग्रेस अब 64 तक आ पहुंची है. वहीं तीन और विधायकों की कमी से विधानसभा में उसकी संख्या 61 तक दिख रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि राज्यसभा में 2 सीटें, भारतीय जनता पार्टी आराम से जीत सकती है. वहीं तीसरी के लिए कांग्रेस को संघर्ष करना पड़ सकता है भले ही उसके पास पर्याप्त मत हैं. फिलहाल एमपी से बीजेपी के जॉर्ज कुरियन, सुमेर सिंह सोलंकी और कांग्रेस से दिग्विजय सिंह राज्यसभा सांसद हैं.

कांग्रेस के तीन विधायक जो अब...

विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के लिए तो स्थिति ही अजब है. वह विधायक तो हैं लेकिन वोट नहीं कर सकते. कोर्ट ने उनके निर्वाचन को शून्य घोषित करने के फैसले को खारिज करते हुए कहा है कि वह राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सकते है. इस मामले में अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी.

उधर, दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एमपी एमएलए कोर्ट ने 3 वर्षों के लिए दोषी करार दिया. इसके बाद उन्हें जमानत तो मिल गई लेकिन विधानसभा सचिवालय ने उनकी सीट खाली घोषित कर दी है जिसके बाद अब इस निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव के आसार हैं. भारती ने इसी सीट से नरोत्तम मिश्रा को चुनाव हराया था.

इन सबके बीच बीना निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्मला सप्रे के संदर्भ में दावा है कि वह भारतीय जनता पार्टी के संपर्क में हैं. दलबदल के मामले में फंसी सप्रे को लेकर स्थितियां स्पष्ट नहीं हैं लेकिन उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पोस्ट होने वाली तस्वीरों में अब कांग्रेस की नेताओं की जगह. बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने ले ली है.

विधायकों के जाने का कनेक्शन राज्यसभा चुनाव से?

उधर, कांग्रस की मध्य प्रदेश इकाई के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने दतिया सीट खाली करन के फैसले को राज्यसभा चुनाव से जोड़ा. सोशल मीडिया साइट एक्स पर उन्होंने लिखा - वाह रे मप्र विधानसभा की न्याय व्यवस्था पिछले कार्यकाल के दौरान भाजपा में गए सचिन बिरला और इस कार्यकाल निर्मला सप्रे के मामले में सालों तक कोई कार्यवाही नहीं होती. लेकिन अब जैसे ही राज्यसभा चुनाव नज़दीक आता है, कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा और राजेंद्र भारती पर रात में विधानसभा सचिवालय खोलकर बिजली की रफ्तार से कार्रवाई हो जाती है. क्या विधानसभा का कानून अब न्याय से नहीं, बल्कि सत्ता के इशारों से चलेगा ? जब कोर्ट ने ही राजेंद्र भारती को 60 दिन की अपील का समय दिया है, तो यह जल्दबाज़ी क्यों ? यह लोकतंत्र का गला घोंटने का कार्य किया है.

दतिया मामले में ही एमपी इकाई के मौजूदा अध्यक्ष जीतू पटवारी भी देर रात विधानसभा पहुंचे. इसके बाद शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में जीतू ने आरोप लगाया कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती जी को अपील के लिए 60 दिनों की मोहलत दी थी, पर उसके बाद भी रात 12 बजे विधानसभा सचिवालय खुलवाकर उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई. 

इसी मामले पर बीजेपी की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि हर पार्टी को न्यायालय के निर्णय का स्वागत करना चाहिए. भारतीय जनता पार्टी अदालत के हर फैसले का समर्थन करती है. विधानसभा अध्यक्ष को सीट रिक्ति के बारे में निर्णय करने का अधिकार है. उपचुनाव के संदर्भ में चुनाव आयोग फैसला लेगा.

एक सीट के लिए कितने विधायकों की जरूरत?

मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा दलीय संख्याबल को देखें तो एक सीट के लिए 58 विधायक चाहिए. कांग्रेस के पास फिलहाल 61 एमएलए हैं. अगले कुछ महीनों में अगर कोई और विधायक पाला नहीं बदलता या चुनाव के वक्त क्रॉस वोटिंग या अब्सेन्ट नहीं रहता तो एक सीट पार्टी के हिस्से आ सकती है. अगर संख्याबल के समीकरण बदले और अगर कांग्रेस के लिए कमजोर हुए, सभी तीन राज्यसभा सीटों पर बीजेपी का कब्जा हो सकता है. 

यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस, तीन सीटों के राज्यसभा चुनाव के लिए क्या रणनीति अपनाती है. सबसे बड़ा जिम्मा जीतू पटवारी पर है कि वह आगामी चुनावों में स्थिति को कैसे पार्टी के पक्ष में लाकर एक सीट जीतने की सफल कोशिश करते हैं.

साभार