मुस्लिम ठेकेदारों को सरकारी कामों में मिलेगा आरक्षण, विरोध के बीच इस सरकार की बड़ी तैयारी

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार फिर से मुस्लिम ठेकेदारों को आरक्षण देने वाला प्रस्ताव लेकर आ रही है. हालांकि भारतीय जनता पार्टी फिर से इसका विरोध कर रही है, लेकिन बताया जा रहा है कि सरकार ने इस बार पूरी तैयारी कर ली है.

Mar 6, 2025 - 17:37
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मुस्लिम ठेकेदारों को सरकारी कामों में मिलेगा आरक्षण, विरोध के बीच इस सरकार की बड़ी तैयारी

मुस्लिम ठेकेदारों को 4 फीसद आरक्षण देने के लिए कर्नाटक सरकार जल्द ही प्रस्ताव लेकर आ रही है. तकरीबन एक साल पहले भी सरकार यह प्रस्ताव लेकर आई थी लेकिन विवाद होने और तुष्टिकरण की राजनीति के आरोपों के बाद वापस ले लिया था. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इसे फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. इस प्रस्ताव के मुताबिक मुस्लिम ठेकेदारों को सार्वजनिक सिविल कार्यों में 4 फीसद रिजर्वेशन दिया जाएगा. सरकार के इस कदम को अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलितों के समर्थन को मजबूत करने की रणनीति माना जा रहा है.

तैयार हो गया खाका

जानकारी के मुताबिक कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार मौजूदा बजट सत्र के दौरान कर्नाटक ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक प्रोक्योरमेंट्स एक्ट, 1999 में संशोधन करने की योजना बना रही है, ताकि यह आरक्षण लागू किया जा सके. बताया जा रहा है कि वित्त विभाग ने इसका खाका तैयार कर लिया है और कानून व संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने इस संशोधन को मंजूरी भी दे दी है.

किसको कितना आरक्षण?

फिलहाल कर्नाटक में सिविल कार्यों के ठेकों में 24 फीसद आरक्षण अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए, 4% अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की कैटेगरी-1 के लिए और 15% OBC कैटेगरी-2A के लिए लागू है. इन सभी को मिलाकर कुल 43% आरक्षण होता है. अब अगर मुस्लिमों को कैटेगरी-2B के तहत 4 फीसद आरक्षण दिया जाता है तो कुल रिजर्वेशन बढ़कर 47% हो जाएगा. साथ ही इस आरक्षण का फायदा पाने वाले ठेकेदारों के लिए ज्यादा से ज्यादा ठेके की सीमा भी बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये भी किया जाएगा.

पहली बार कब दिया गया आरक्षण

सिद्धारमैया जब पहली बार 2013-18 के लिए मुख्यमंत्री बने थे तब उन्होंने एससी/एसटी ठेकेदारों को सरकारी कामों में आरक्षण देने की शुरुआत की थी. इस साल की शुरुआत में दो OBC वर्गों को भी यही फायदा दिया गया. कैटेगरी-1 में बेस्टा, उप्पारा और दलित ईसाई जैसे समुदाय आते हैं, जबकि कैटेगरी-2A में कुरुबा, इडिगा और अन्य 100 से ज्यादा समुदाय शामिल हैं. खुद सिद्धारमैया भी कुरुबा समुदाय से आते हैं.

भाजपा कर रही है विरोध

हालांकि, इस प्रस्ताव का विरोध भी हो रहा है. वोक्कालिगा और लिंगायत समुदायों के ठेकेदार इससे नाराज हैं, क्योंकि उन्हें ऐसा कोई आरक्षण नहीं मिलता. बीजेपी ने इसे असंवैधानिक और तुष्टिकरण की राजनीति बताया है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा कि कांग्रेस समाज को धर्म के आधार पर बांटने का काम कर रही है. 

'तुष्टिकरण की चरम सीमा'

विजयेंद्र ने आगे कहा,'कांग्रेस सिर्फ मुस्लिमों को ही अल्पसंख्यक मानती है और अन्य वंचित समुदायों को नजरअंदाज कर रही है. उनका कहना है कि मुस्लिमों को पहले से ही शिक्षा और रोजगार में आरक्षण मिला हुआ है, जो संविधान के खिलाफ है. अब सरकारी ठेकों में भी उन्हें 4% आरक्षण देना तुष्टिकरण की चरम सीमा है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह सभी अल्पसंख्यकों के लिए होता तो बीजेपी को कोई आपत्ति नहीं होती.'

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