वाराणसी में पीएम मोदी ने क्यों दिलाई सोमनाथ मंदिर की याद? लोकसभा चुनाव 2024 से क्या है कनेक्शन, पूरी कहानी
लोकसभा चुनाव 2024 से पहले अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पीएम मोदी ने लोगों को आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और उसके विरोध की याद दिलाई है. मुद्दे पर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की राय अलग थी.आइए, जानते हैं कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और उसके विरोध से जुड़ा इतिहास क्या है?
बाबा विश्वनाथ की नगरी में दुनिया के सबसे विशाल ध्यान केंद्र स्वर्वेद महामंदिर (Swarved Mahamandir) का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) की याद दिलाई. लोकसभा चुनाव 2024 से पहले अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पीएम मोदी ने बताया कि गुजरात स्थित हिंदुओं की आस्था के केंद्र भागवान शिव के ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर का मुस्लिम हमलावरों ने 17 बार विध्वंस किया. पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का भी विरोध किया गया था. उन्होंने लोगों को याद दिलाई कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और उसके वैभव को लौटाने का संकल्प किया. महात्मा गांधी उनके पक्ष में थे. पुनर्निर्माण के बाद सोमनाथ मंदिर के कार्यक्रम में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी गए थे. हालांकि, तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को इस सबसे एतराज था.
सोमनाथ मंदिर को लेकर तत्कालीन राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री के बीच वैचारिक टकराव
आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के विरोध को लेकर भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से पंडित नेहरू की आलोचना करती रहती है. पुनर्निर्माण के बाद सोमनाथ मंदिर के पहले भव्य कार्यक्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के बतौर अध्यक्ष शामिल होने को लेकर भी पंडित नेहरू असहमत थे. राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री के बीच इस मुद्दे पर वैचारिक टकराव भी हुआ था. यहां तक कि पंडित नेहरू ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर भी इस कार्यक्रम से दूरी बनाने की नसीहत दी थी. आइए, जानते हैं कि वाराणसी में पीएम मोदी जो कहा उसकी पूरी ऐतिहासिक कहानी क्या है? इसके बाद जानने की कोशिश करेंगे कि पीएम मोदी के बयानों का लोकसभा चुनाव 2024 से क्या कनेक्शन है?
साभार