वोटों की गिनती कैसे होती है? सेंटर पर किसे जाने की अनुमति, कौन देता है सर्टिफिकेट; पूरी प्रक्रिया जान लीजिए

लोकसभा की 543 सीटों के लिए 19 अप्रैल से 1 जून के बीच 7 चरणों में चुनाव कराए गए थे. आम चुनाव 2024 की मतगणना प्रक्रिया 4 जून को सुबह 8 बजे से शुरू होगी. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि वोटों की गिनती कैसे होती है? काउंटिंग सेंटर पर किसे जाने की अनुमति होती है?

Jun 3, 2024 - 15:45
 0  12
वोटों की गिनती कैसे होती है? सेंटर पर किसे जाने की अनुमति, कौन देता है सर्टिफिकेट; पूरी प्रक्रिया जान लीजिए

लोकसभा चुनाव के वोटों की गिनती शुरू होने में अब 24 घंटे से भी कम समय बचा है. ईवीएम (EVM) से वोटों की गिनती से पहले उसकी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और स्ट्रॉन्ग रूम में केंद्रीय बलों समेत पुलिस को भी तैनात किया गया है. बता दें कि लोकसभा की 543 सीटों के लिए 19 अप्रैल से 1 जून के बीच 7 चरणों में चुनाव कराए गए थे. आम चुनाव 2024 की मतगणना प्रक्रिया 4 जून को सुबह 8 बजे से शुरू होगी.

चुनाव आयोग (ECI) चुनाव कराने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल करता है. चुनाव आयोग इससे पहले चार आम चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल कर चुका है. चुनाव में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 2013 में ईवीएम में वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) सिस्टम जोड़ा गया था. वीवीपीएट के साथ प्रिंटर की तरह की एक मशीन वोटिंग सिस्टम से जुड़ी होती है, जिसके तहत इसमें मतदाता द्वारा उम्मीदवार के नाम का बटन दबाते ही उस उम्मीदवार के नाम और राजनीतिक दल के चिन्ह की पर्ची अगले दस सेकेंड में मशीन से बाहर निकलती है और एक सुरक्षित बक्से में गिर जाती है.

चुनाव में वोटों की गिनती कौन करता है?

निर्वाचन आयोग (ECI) चुनावी प्रक्रिया के तारीखों की घोषणा करते हुए ही मतगणना की तिथि की जानकारी दे देता है. मतदान के बाद स्ट्रॉन्ग रूम बनाया जाता है, जहां ईवीएम को कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है. वोटों की गिनती की जिम्मेदारी रिटर्निंग ऑफिसर (RO) की होती है, जिसकी नियुक्ति राज्य सरकार की सलाह पर चुनाव आयोग करता है. आमतौर पर जिलाधिकारी को ही लोकसभा चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर बनाया जाता है और आरओ ही मतगणना के लिए सही जगह चुनते हैं. मतगणना की तारीख और समय का फैसला चुनाव आयोग करता है. आमतौर पर वोटों की गिनती सुबह 8 बजे शुरू होती है, लेकिन विशेष परिस्थिति में रिटर्निग ऑफिसर के निर्देश पर समय बदला जा सकता है. 

सबसे पहले बैलेट पेपर और इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट सिस्टम (ETPBS) के वोटों की गिनती होती है. इसमें करीब आधे घंटे का समय लगता है और इसके बाद ईवीएम के वोटों की गिनती शुरू होती है. इसके बाद गिनती का पहला रुझान आने लगता है, जिसकी घोषणा रिटर्निंग ऑफिसर (RO) प्रत्येक राउंड की गिनती के बाद करते हैं. चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी इसे अपडेट किया जाता है.

कितने राउंड में होती है मतों की गिनती?

किसी भी संसदीय क्षेत्र के सभी विधानसभा क्षेत्रों के वोटों की गिनती एक ही हॉल में होती है. हालांकि, संसदीय क्षेत्र की मतगणना एक से ज्यादा जगहों पर की जा सकती है. मतगणना कितने राउंड में होगी, यह वोटों और ईवीएम की संख्या पर निर्भर करता है. मतगणना के दौरान प्रत्येक राउंड में 14 ईवीएम से मतों की गिनती की जाती है. हालांकि, अगर किसी राज्य में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हुए हो तो 7 टेबल पर विधानसभा चुनावों के मतों की गिनती और बाकी 7 टेबल पर संसदीय चुनावों के वोटों की गिनती की जाती है. इस बार ओडिशा और आंध्र प्रदेश में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव के वोटों की भी गिनती होगी.

मतगणना प्रक्रिया क्या है?

वोटिंग के बाद ईवीएम (EVM) को कड़ी सुरक्षा में स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है और मतगणना वाले दिन सुबह 7 बजे के करीब रिटर्निंग ऑफिसर (RO) और चुनाव आयोग के स्पेशल ऑब्जर्वर के अलावा सभी उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधि की मौजूदगी में स्ट्रॉन्ग रूम का ताला खोला जाता है. इसके बाद ईवीएम की कंट्रोल यूनिट (CU) काउंटिंग टेबल पर लाई जाती है और यूनिक आईडी और सील का मिलान किया जाता है. इसे उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट को भी दिखाया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वीडियोग्राफी की जाती है और सीसीटीवी से भी निगरानी रखी जाती है.

यूनिक आईडी के मिलान के बाद कंट्रोल यूनिट में बटन प्रेस करते ही हर उम्मीदवार का वोट ईवीएम में उसके नाम के आगे दिखने लगता है. मतगणना रिटर्निंग ऑफिसर (RO) द्वारा नियुक्त मतगणना पर्यवेक्षक करते हैं. मतगणना हॉल में उम्मीदवारों के साथ उनके मतगणना एजेंट और चुनाव एजेंट भी मौजूद होते हैं.

मतगणना सेंटर पर किसे जाने की होती है अनुमति?

मतगणना के दौरान किसी भी हॉल में एक उम्मीदवार की ओर से अधिकतम 15 एजेंट के रहने की अनुमति होती है. सभी टेबलों पर हर उम्मीदवार की ओर से एक एजेंट होता है. इसके अलावा एक एजेंट रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के पास बैठता है. किसी विशेष परिस्थिति में जब टेबल की संख्या बढ़ाई जाती है, तब उम्मीदवार के एजेंट की संख्या भी बढ़ा जा सकती है. उम्मदीवार अपने एजेंट को खुद चुनता है और फिर स्थानीय निर्वाचन अधिकारी से अप्रूव करवाता है. इसके बाद मतगणना से तीन दिन पहले एजेंटों की लिस्ट नाम और फोटो के साथ जारी की जाती है.

कैसे किया जाता है VVPAT पर्चियों का मिलान?

इलेक्ट्रिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम से वोटों की गिनती की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वीवीपैट के मिलान की प्रक्रिया शुरू की जाती है. इसका इस्तेमाल ईवीएम के नतीजों की पुष्टि के लिए किया जा सकता है. चुनाव आयोग के अनुसार, वीवीपैट के सत्यापन का काम मतगणना हॉल के भीतर स्थित एक सुरक्षित वीवीपैट काउंटिंग बूथ के अंदर किया जाता है.

जीत के बाद उम्मीदवार को कौन देता है सर्टिफिकेट?

कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स के नियम 63 के मुताबिक, मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद काउंटिंग सेंटर पर मौजूद रिटर्निंग ऑफिसर (RO) हर उम्मीदवार को मिले वोट का डेटा रिजल्ट शीट में डालते हैं और नतीजों की घोषणा करते हैं. इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर के जरिए विजेता उम्‍मीदवार को जीत का सर्टिफिकेट दिया जाता है. सर्टिफिकेट दिए जाने के बाद ही उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित होती है.

काउंटिंग के बाद ईवीएम का क्या होता है?

चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद इस्तेमाल किए गए ईवीएम (EVM) को फिर से स्ट्रांग रूम में रख दिया जाता है. मतगणना के 45 दिनों तक ईवीएम उसी स्ट्रॉन्ग रूम में रखी रहती है और फिर उसे बड़े स्टोर रूम में ट्रांसफर कर दिया जाता है. चुनाव आयोग इन सभी ईवीएम के डेटा को 6 महीने तक सुरक्षित रखता है और इसके बाद इन डेटा को सुरक्षित तरीके से डंप किया जाता है. इस दौरान इन ईवीएम का इस्तेमाल किसी भी चुनाव में नहीं किया जाता है और डेटा डंप करने के बाद ईवीएम मशीनों को आगे के चुनाव में इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है.

साभार