वो एयरलाइंस की एक स्कीम थी... मोदी ने बताया बिना होटल लिए कैसे घूम लिए थे अमेरिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी पत्रिका न्यूजवीक को दिए इंटरव्यू (Modi Newsweek Interview in Hindi) में अपने अमेरिका दौरे के बारे में एक दिलचस्प किस्सा सुनाया है. यह बताता है कि मोदी सीएम बनने से भी पहले किस तरह प्लानिंग करते थे. उन्होंने एक एयरलाइंस की स्कीम का लाभ लेते हुए अमेरिका घूम लिया था.
प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बनने के बाद अगर कोई नेता विदेश जाता है तो उसके साथ प्रोटोकॉल होता है. उसे अपने से किराये, गाड़ी, होटल आदि के बारे में सोचना नहीं पड़ता है. स्टाफ यह काम आराम से देख लेता है. हालांकि जब आम आदमी परदेस में घूमने गया हो तो बहुत सी चीजें सोचनी समझनी पड़ती हैं. तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम भी नहीं बने थे. एक आम नागरिक की तरह वह अमेरिका गए. अमेरिकी पत्रिका 'न्यूजवीक' को दिए इंटरव्यू में पीएम ने बताया कि कैसे उन्होंने एक एयरलाइंस की स्कीम का फायदा उठाते हुए अमेरिका के करीब 29 राज्य घूम लिए थे.
पीएम ने विदेश में बसे भारतीय समुदाय से अपने जुड़ाव के बारे में बात करते हुए किस्सा सुनाया. उन्होंने कहा कि जब वह राजनीति में आए भी नहीं थे, उससे पहले से उनका प्रवासी भारतीय समुदाय से नाता रहा है.
मोदी ने बताया कि उन्होंने अमेरिका में खूब यात्राएं की थीं. तब डेल्टा एयरलाइंस की एक स्कीम थी जिसमें एक महीने के लिए असीमित छूट वाली यात्रा (Unlimited Discounted Travel) की पेशकश की जाती थी. हालांकि साथ में कोई सामान लेकर चलने की अनुमति नहीं होती थीऔर सीटों का कोई रिजर्वेशन भी नहीं होता था. पीएम ने बताया कि उन्होंने काफी विचार करके अपनी यात्राओं की योजना बनाई. इसके लिए उन्होंने मैप की भी मदद ली, जो वह अक्सर अपने पास रखते थे.
ताकि होटल न लेना पड़े
पीएम ने कहा, 'मैं सीट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रात वाली फ्लाइट (Red-Eye Flight) पकड़ता था जो सुबह पहुंचा देती थी. इसके अलावा होटल में रुकने की जरूरत ही न पड़े. इसके लिए लंबी उड़ानों का विकल्प चुनता. सुबह हमारे प्रवासियों में से कोई मुझे रिसीव कर लेता और मैं पूरा दिन समुदाय के साथ बिताता था. इस तरह मैंने उन्हें बारीकी से समझा और समय के साथ उन्हें अच्छी तरह से जानने लगा. मैं उनकी क्षमता और आकांक्षाओं को समझता था लेकिन उनके पास सपोर्ट और मार्गदर्शन की कमी थी
इंटरव्यू में पीएम ने आगे कहा कि हमारा प्रवासी समुदाय लंबे समय से विदेश में रह रहा है. दो से तीन पीढ़ियां हो गई होंगी. पुरानी पीढ़ी के लिए अपनी जड़ों के साथ एक विशेष संबंध महसूस करना स्वाभाविक है. वे चाहते हैं कि उनके बच्चे भी उनकी जड़ों से जुड़े रहें और यह सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है कि यह बंधन मजबूत रहे. हमारे प्रवासियों को यह महसूस होना चाहिए कि घर पर कोई है जो उनकी परवाह करता है और किसी भी स्थिति में उनके लिए मौजूद है. हमने यह सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास किए हैं.
पीएम ने कहा कि जब भी मैं विदेश जाता हूं, उस देश के नेता हमेशा भारतीय प्रवासियों की बहुत प्रशंसा करते हैं. वे दुनियाभर में हमारे राजदूत के रूप में काम कर रहे हैं.
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