हिमाचल सरकार के इस बिल ने मचाई खलबली! बार-बार दल बदलने वाले नेताओं को बड़ा झटका

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को एक विधेयक पेश किया गया जिसका उद्देश्य दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराए गए सदस्यों को मिलने वाले पेंशन लाभ रोकना है.

Sep 4, 2024 - 19:59
 0  11
हिमाचल सरकार के इस बिल ने मचाई खलबली! बार-बार दल बदलने वाले नेताओं को बड़ा झटका

विधेयक में अयोग्य विधायकों की पेंशन रोकने का प्रावधान

दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराए गए नेताओं को नुकसान

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किए गए सदस्यों के पेंशन लाभ रोकने के लिए एक विधेयक पेश किया गया. हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक 2024 को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पेश किया.

विधेयक में प्रावधान है कि, 'यदि कोई व्यक्ति संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी भी समय अयोग्य घोषित कर दिया गया हो तो वह अधिनियम के तहत पेंशन पाने का हकदार नहीं होगा.'

छह कांग्रेस विधायकों पर हुआ था एक्शन

इस साल की शुरुआत में, छह कांग्रेस विधायकों-सुधीर शर्मा, रवि ठाकुर, राजिंदर राणा, इंदर दत्त लखनपाल, चेतन्य शर्मा और देविंदर कुमार को 2024-25 के बजट पारित होने और कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मतदान से दूर रहने के कारण पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था. हालांकि सुधीर शर्मा और इंदर दत्त लखनपाल ने उपचुनावों के माध्यम से अपनी सीटें फिर से हासिल कर लीं, लेकिन अन्य चार फिर से चुनाव जीतने में असफल रहे.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इन छह विधायकों ने 27 फरवरी, 2024 को हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन का भी समर्थन किया था. संशोधन के उद्देश्य और कारण विधेयक की आवश्यकता उजागर करते हैं जिसमें 1971 के अधिनियम में दलबदल को ठीक करने, संवैधानिक उल्लंघनों को रोकने, जनादेश की रक्षा करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने के प्रावधानों की अनुपस्थिति का हवाला दिया गया है.

साभार