BJP की 'दशा और दिशा' तय करेगा राज्यसभा चुनाव, 12 सीटों की हार-जीत से कैसे बदलेगा सदन का गणित?
देश के 9 राज्यों की 12 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है. ये चुनाव भाजपा के लिए काफी अहम है. NDA फिलहाल राज्यसभा में बहुमत से 13 सीटें दूर हैं. इस चुनाव से सदन का गणित बदल जाएगा.
3 सितंबर को उपचुनाव
12 सीटों के लिए वोटिंग
देश में 12 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं. इनके लिए 3 सितंबर को वोटिंग होगी. 9 राज्यों में पार्टियों ने राज्यसभा चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं. ये चुनाव भाजपा के लिए काफी अहम माना जा रहा है. यदि बीजेपी इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करती है तो सदन में उसकी स्थिति मजबूत होगी. यदि प्रदर्शन निराशाजनक रहता है तो स्थिति कमजोर होगी. आइए, जानते हैं कि ये राज्यसभा चुनाव कैसे सदन के गणित को बदलेगा?
किस राज्य में कितनी राज्यसभा सीटों पर चुनाव?
महाराष्ट्र: 2 सीटें
बिहार: 2 सीटें
हरियाणा: 1 सीट
राजस्थान: 1 सीट
मध्य प्रदेश: 1 सीट
ओडिशा: 1 सीट
तेलंगाना: 1 सीट
असम: सीटें
त्रिपुरा: 1 सीट
भाजपा को किन राज्यों में उम्मीद?
भाजपा को मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, असम, राजस्थान और ओडिशा से उम्मीद हैं. पार्टी इन राज्यों की 5 सीटों पर मजबूत मानी जा रही है. यहां पर BJP को कंफर्टेबल मेजोरिटी मिल सकती हैं, क्योंकि इन राज्यों में भाजप के पास पर्याप्त विधायक और बहुमत है.
इन 3 राज्यों में हो सकती है कड़ी टक्कर
महाराष्ट्र और बिहार में विपक्ष मजबूत है. यहां पर कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है. महाराष्ट्र में NCP (शरद गुट), शिवसेना (उद्धव गुट) और कांग्रेस का गठबंधन है, जो महायुति गठबंधन को राज्यसभा चुनाव में टक्कर दे सकता है. इसी तरह बिहार में भी BJP और JDU को RJD और कांग्रेस मजबूती से टक्कर देगी. हरियाणा सबसे हॉट स्टेट बना हुआ, यहां पर राज्यसभा चुनाव में बेहद कड़ा और नजदीकी मुकाबला देखने को मिल सकता है. निर्दलीय और JJP के विधायकों पर सबकी नजरें टिकी हैं.
कैसे बदलेगा राज्यसभा का गणित?
राज्यसभा में भाजपा के पास फिलहाल 226 में से 86 सीटें हैं. NDA की कुल 101 सीटें हैं. NDA बहुमत से 13 सीटें दूर है. यदि सभी 12 सीटों पर NDA को जीत मिलती है तो यह बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी. कई बिल आसानी से पास हो जाएंगे. वक्फ संशोधन बिल भी राज्यसभा में पेश होगा, इसे पास कराने के लिए भी भाजपा को खास मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी. लेकिन भाजपा को इन सीटों पर हार झेलनी पड़ती है तो राज्यसभा में गणित गड़बड़ा जाएगा. पार्टी के लिए अपनी पसंद के बिल पास कराना बेहद कठिन हो जाएगा.
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