ED से ली छुट्टी, कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने MP पहुंचे अरविंद केजरीवाल
दिल्ली शराब घोटाले में सीएम अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होना था. लेकिन वो ईडी से छुट्टी ले मध्य प्रदेश के विंध्य इलाके में प्रचार करने जा रहे हैं. सिंगरौली में ना सिर्फ चुनावी सभा बल्कि रोड शो भी करेंगे.
एक कहावत है कि सियासत में जो नजर आए उसे समझो की हो नहीं रहा और जो नजर ना आए उसे समझो कि कुछ बात है. सवाल यह है कि इसके लिखने की पीछे वजह क्या है. दरअसल दिल्ली शराब घोटाले में सीएम अरविंद केजरीवाल को जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होना था. लेकिन उन्होंने छुट्टी ले ली और मध्य प्रदेश में चुनावी प्रचार के लिय निकल गए. यहां हम पहले यह बताएंगे कि अरविंद केजरीवाल मध्य प्रदेश के किस इलाके में प्रचार करने वाले हैं. बता दें कि विंध्य इलाके के दौरे पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान दोनों हैं. यहां वे सिंगरौली में ना सिर्फ रैली बल्कि रोड शो भी करेंगे. अब सवाल यह है कि उनकी रैली की वजह से वजह से कांग्रेस को कैसे नुकसान होगा. अगर कांग्रेस को नुकसान होता है तो उसके पीछे आधार क्या है.
आखिर कांग्रेस को नुकसान क्यों
आम आदमी पार्टी की वजह से कांग्रेस को नुकसान क्यों होगा. उसके पीछे पुख्ता आधार है. इसके लिए थोड़ा पीछे चलने की जरूरत है. दिल्ली में शीला दीक्षित नॉन स्टॉप 15 साल तक शासन करने में कामयाब रहीं. लेकिन 2009-10 से तस्वीर बदलनी शुरू हो चुकी थी. उस दौरान यूपीए 2 शासन के दौरान घोटाले के एक से बढ़कर एक मामले सामने आ रहे थे. सूचना के अधिकार से सुर्खियों में आ चुके केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चलाया. वैसे तो वो कहा करते थे कि आंदोलन के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं है, हालांकि समय के हिसाब से उनकी सोच बदली और आम आदमी पार्टी के तौर पर एक राजनीतिक दल का उदय हुआ. इसका अर्थ साफ था कि अब वो सियासी तौर पर कांग्रेस के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हो चुके थे. चुनावी मैदान में दो दो हाथ करने के लिए 2014 में वो दिल्ली के चुनावी समर में उतरे. नतीजा हैरान करने वाला था. वो बड़े दल के तौर पर सामने आए और कांग्रेस की मदद से ही सरकार बनाए. लेकिन वो गठबंधन बेमेल साबित हुआ और इस्तीफा दे दिए. राजनीति अपने चाल से आगे बढ़ती रही. साल 2015 का आया और प्रचंड बहुमत के साथ वो सरकार बनाने में कामयाब हुए.
2015 के चुनावी नतीजों का जब विश्लेषण हुआ तो उसमें एक बात स्पष्ट तौर पर नजर आई कि वे कांग्रेस को बुरी तरह नुकसान पहुंचा चुके थे. कांग्रेस को किस कदर नुकसान हुआ कि उसकी भरपाई कांग्रेस 2020 के चुनाव में भी नहीं कर सकी. यही नहीं पंजाब के चुनाव में आम आदमी पार्टी की शानदार विजय ने यह साफ कर दिया कि कांग्रेस की कीमत पर वो आगे बढ़ रहे हैं. इस सवाल के जवाब में कुछ जानकार कहते हैं कि पंजाब में सत्ता विरोधी लहर की वजह से आप की राह आसान हो गई. हालांकि यह तर्क गुजरात विधानसभा चुनाव पर सटीक नहीं बैठ रहा था. इसका अर्थ यह हुआ कि जहां कहीं भी आम आदमी पार्टी की जीत हासिल हो रही है वो कांग्रेस की कीमत पर ही हो रही है.
विंध्य में 'आप' का खेला, बिगाड़ देगा कांग्रेस का काम !
अब बात करते हैं मध्य प्रदेश की. मध्य प्रदेश में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं, सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को कम से कम 116 विधायकों की जरूरत होगी. अगर आम आदमी पार्टी की बात करें तो सिर्फ 70 सीटों पर इसके उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इसका अर्थ यह हुआ कि अरविंद केजरीवाल की लड़ाई सरकार बनाने के लिए नहीं है बल्कि वो किसी का खेल खराब कर सकते हैं. राजनीतिक जीत में वैसे तो सिर्फ अंकगणित की भूमिका नहीं होती है बल्कि केमिस्ट्री भी काम करती है. अगर आप के समर्थन में केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स दोनों काम कर गई तो इसका अर्थ यह है कि वो किसी भी दल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. अगर विंध्य इलाके की बात करें तो 2018 के चुनावी नतीजों में कांग्रेस को फायदा मिला था. अरविंद केजरीवाल इस समय विंध्य इलाके पर ही अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ऐसी सूरत में कांग्रेस को नुकसान पहुंचने की संभावना अधिक है.
साभार