आज तक नहीं कोई नहीं ढूंढ पाया इस गुफा का छोर, यहां से है चार धाम का जाने रास्ता!

अब तक आपने चार धाम जाने के कई रास्ते सुने और देखें होंगे, पर हम आपको ऐसा चार धाम जाने का रास्ता बताते हैं जिसके बारे में आप आज तक नहीं जानते होंगे. यह रास्ता कोई आम रास्त नहीं बल्कि गुफा है जिसे चारधाम का रास्ता मानकर पूजा जाता है

Oct 21, 2024 - 16:57
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आज तक नहीं कोई नहीं ढूंढ पाया इस गुफा का छोर, यहां से है चार धाम का जाने रास्ता!

एमपी के उज्जैन की भर्तृहरि गुफा के अंदर से चार धाम का रास्ता जाता है. एक ऐसी गुफा जंहा राजा भर्तहरि ने 12 साल तक तपस्या की भर्तृहरि की. इसी गुफा में तपस्या से इंद्रा का सिंहासन डोल गया था. इंद्र ने वज्र प्रहार किया था, जिसके निशान आज भी आज मौजूद हैं. ऐसा दावा है कि इसी गुफा से राजा भर्तृहरि चारधाम के लिए जाया करते थे.

हजारों साल पुरानी इस गुफा के चार धाम के रास्ते का सच जानने जब हम गुफा के अंदर पहुंचे तो गहरे और सकरे रास्ते से होकर कई फीट नीचे गुफा में जाया जा सकता है. जहां सांसे लेने में परेशानी तक हो जाती है. गर्मी और ऑक्सीजन की कमी से शरीर मे पसीना पानी की तरह बहने लगता है. जहां ज्यादा देर तक रहना आम इंसान के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है

वापस नहीं आए अंग्रेज

गुफा के संत बताते हैं कि इस गुफा से चारधाम के रास्ते का पता लगाने के लिए चार अंग्रेज जब अंदर गए तो आज नहीं लौटे और तब से अब तक ये रास्ता बंद है. जहां सांस लेने में दिक्कत होती है. जहां शरीर से पसीना पानी की तरह वह निकलता है. जानकर संत बताते हैं कि इसी रास्ते से राजा भर्तृहरि चारधाम की यात्रा पर गए थे. 

गुफा में आती है पॉजिटिव वाइब्स

गुफा घूमने आने वाले यूपी के एक जत्थे से जब गुफा की हकीकत जानी तो छोटे बड़े सभी ने कहा के अंदर एक पॉजिटिव वाइब आती हैं.. जो बताती हैं कि यह एक तप स्थल है. साथ ही उन्होंने कहा कि जब हम अंदर गए तो हम बहुत भौचक्के रह गए कि यहां से चारधाम जाने का रास्ता है. लोगों का कहना है कि गुफा के अंदर घबराहट नहीं जबकि अच्छा महसूस होता है. यह बताता है कि यहां देवी शक्ति का वास है.

रात में बंद हो जाती है गुफा

जिस गुफा से चार धाम जाने का रास्ता है. इसका एक सच यह भी है कि रात 9:00 बजे के बाद इस गुफा के अंदर कोई नहीं जाता, ना किसी ने जाने की जहमत उठाई. यह गुफा रात में बंद रहती है और सुबह खुलती है बरसों से यह गुफा जस है न कोई इसमें धसान हुई, ना चट्टानों में टूट फूट हो रही है.

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