आज से 52वां खजुराहो नृत्य समारोह शुरू; जानिए क्या कुछ होगा खास

इस वर्ष का मुख्य आकर्षण ‘नटराज – नृत्य, लय और सृजन’ थीम को बनाया गया है, जो भारतीय दर्शन और जीवन की लयबद्ध दृष्टि का प्रतीक मानी जाती है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विज़न के अनुरूप, आयोजक मंडल का कहना है कि इस थीम से कार्यक्रम को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गहराई मिलेगी.

Feb 20, 2026 - 17:38
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आज से 52वां खजुराहो नृत्य समारोह शुरू; जानिए क्या कुछ होगा खास

खजुराहो के विश्वविख्यात मंदिर समूह की पृष्ठभूमि में आयोजित होने जा रहा 52वां अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह एक बार फिर भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविधता और भव्यता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा. 20 से 26 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस सात दिवसीय उत्सव में देश‑विदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे. भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मणिपुरी और मोहिनीअट्टम जैसी प्रमुख शास्त्रीय शैलियाँ इस वर्ष भी मंच पर अपनी चमक बिखेरेंगी. प्राचीन मंदिरों की भव्यता, प्रकाश सज्जा और नृत्य की अभिव्यक्ति मिलकर भारतीय सांस्कृतिक विरासत को एक अद्भुत रूप में पेश करेंगे. हर साल की तरह इस बार भी देश‑विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक और कलारसिक खजुराहो पहुंचेंगे.

इन संस्थाओं के सहयोग से आयोजन

उस्ताद अलाउद्दीन ख़ां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा आयोजित इस समारोह का आयोजन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र और छतरपुर जिला प्रशासन के सहयोग से हो रहा है.

आयोजकों के अनुसार, यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके आयोजन को इस बार और व्यापक बनाने के लिए कई नई पहलें की गई हैं.

नटराज' थीम बनेगी विशेष आकर्षण

इस वर्ष का मुख्य आकर्षण ‘नटराज – नृत्य, लय और सृजन' थीम को बनाया गया है, जो भारतीय दर्शन और जीवन की लयबद्ध दृष्टि का प्रतीक मानी जाती है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विज़न के अनुरूप, आयोजक मंडल का कहना है कि इस थीम से कार्यक्रम को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गहराई मिलेगी.

पहली बार सांस्कृतिक रैली और बाल नृत्य महोत्सव

समारोह में पद्म पुरस्कार विजेता, संगीत नाटक अकादमी सम्मानित कलाकारों के साथ‑साथ उदीयमान प्रतिभाओं को भी मंच दिया जाएगा. विभिन्न नृत्य शैलियों में कुल 23 प्रमुख प्रस्तुतियाँ होंगी. 52वें संस्करण में पहली बार खजुराहो नगर में एक सांस्कृतिक रैली निकाली जाएगी, जिसमें विभिन्न नृत्य परंपराओं के कलाकार मुख्य मंच तक परंपरागत वेशभूषा और वाद्यों के साथ पहुंचेंगे. इसके अलावा 10 से 16 वर्ष आयु वर्ग के युवा कलाकारों के लिए राष्ट्रीय बाल नृत्य महोत्सव – 2026 का भी आयोजन किया जा रहा है. इसमें वरिष्ठ गुरुओं द्वारा चयनित 31 युवा कलाकार प्रस्तुति देंगे.

ये गतिविधियां भी होंगी आकर्षण का केंद्र

पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों के लिए समारोह के दौरान कई गतिविधियाँ आयोजित होंगी, जिनमें शामिल हैं :

खजुराहो कार्निवाल‘नटराज' प्रदर्शनी : 50 नृत्यरूपों का प्रदर्शनलयशाला : श्रेष्ठ गुरुओं व शिष्यों का संगमकलावार्ता : कलाविदों और कलाकारों के बीच संवादआर्ट-मार्ट : चित्रकला प्रदर्शनीसृजन : पारंपरिक शिल्प निर्माण तकनीक का प्रदर्शनहुनर : पारंपरिक शिल्पों की प्रदर्शनी व बिक्रीस्वाद : देशज व्यंजनों का संगम

पर्यटन विभाग की रोमांचक गतिविधियां

पर्यटन की दृष्टि से पहले से ही लोकप्रिय खजुराहो में इस बार मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग कई विशेष गतिविधियाँ आयोजित करेगा. इनमें घुमन्तू समुदायों के साथ गाँवों की सैर, एक दिवसीय कैम्पिंग कार्यक्रम, नेचर वॉक, विलेज टूर, ई‑बाइक टूर, वॉटर स्पोर्ट्स, हॉट एयर बैलून और फेम टूर शामिल हैं.

20 से 26 फरवरी तक की नृत्य प्रस्तुतियां सायं 6:30 बजे से

20 फरवरी, 2026

पद्मश्री ममता शंकर, कोलकत्ता - कथकअनुराधा वेंकटरमन, चेन्नई - भरतनाट्यमशुभदा वराडकर, मुम्बई - ओडिसी

21 फरवरी, 2026

विश्वदीप, दिल्ली - कथकअक्मादल काईनारोवा, कजाकिस्तान - भरतनाट्यमप्रभात मेहतो, झारखंड - छाऊ

22 फरवरी, 2026

एसएनए अवार्डी थोकचोम इवेमुबि देवी, मणिपुर - मणिपुरीपद्मश्री दुर्गाचरण रनवीर, ओडिसा - ओडिसीसत्रिया केन्द्र समूह, असम - सत्रिया

23 फरवरी, 2026

नव्या नायर, चेन्नई - भरतनाट्यमएसएनए अवार्डी कोट्टक्कल नंदकुमार नायर, केरल - कथकलीपद्मश्री पद्मजा रेड्डी, हैदराबाद – कुचिपुड़ी

24 फरवरी, 2026

शिंजनी कुलकर्णी, दिल्ली - कथकपद्मश्री इलियाना सिटर, भुवनेश्वर - ओडिसीपद्मश्री कलामंडलम क्षमावेती, केरल - मोहिनीअट्टम

25 फरवरी, 2026

एसएनए अवार्डी शाश्वती सेन, दिल्ली - कथकमोहंती, भुवनेश्वर - ओडिसीएसएनए अवार्डी नयनसखी देवी, मणिपुर – मणिपुरीखुशबू पांचाल, उज्जैन – कथक समूह  

26 फरवरी, 2026

सुनयना हजारीलाल, मुम्बई - कथकपद्मश्री प्रतिभा प्रहलाद, बैंगलुरु - भरतनाट्यमएसएनए अवार्डी सुश्री भावना रेड्डी, दिल्ली - कुचीपुड़ीप्रभुतोष पाण्डा, भुवनेश्वर - ओडिसी.

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