उज्जैन: राजाधिराज बाबा महाकाल की निकली भव्य शाही सवारी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हुए शामिल

उज्जैन में राजाधिराज बाबा महाकाल की राजसी सवारी धूमधाम से निकाली गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर का विधि-विधान से पूजन और आरती की।

Aug 19, 2025 - 17:19
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उज्जैन: राजाधिराज बाबा महाकाल की निकली भव्य शाही सवारी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हुए शामिल

मध्य प्रदेश: उज्जैन में राजाधिराज बाबा महाकाल की राजसी सवारी धूमधाम से निकाली गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन पहुंचकर बाबा महाकाल से प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देशभर में श्रावण मास में पूर्णिमा से पूर्णिमा तक महादेव की सवारियां निकलती हैं। लेकिन उत्तर और दक्षिण परंपराओं के अनुसार, भादवा (भाद्रपद) के दो सोमवार तक भी बाबा महाकाल की सवारी निकलती है। आज उज्जैन में बाबा महाकाल ने आखिरी (राजसी) सवारी कर नगर भ्रमण किया और अपनी प्रजा (जनता) के हाल-चाल जाने। बाबा ने अपने राजाधिराज स्वरुप में भक्तों को दिव्य दर्शन दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल के साथ श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर का विधि-विधान से पूजन और आरती की। इसके बाद, निर्धारित समय पर पालकी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। मुख्य द्वार पर पहुंचते ही मुख्यमंत्री की इच्छानुसार हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। सशस्त्र पुलिस बल और विभिन्न बटालियनों के जवानों ने सवारी को सलामी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खुद भी इस सवारी में हिस्सा लिया और डमरू व झांझ बजाकर भगवान की भक्ति में लीन नजर आए।

छह रूपों में दिए दर्शन

इस भव्य राजसी सवारी में बाबा महाकाल ने भक्तों को अपने छह विभिन्न स्वरूपों में दर्शन दिए-

श्री चंद्रमौलेश्वर: रजत पालकी में विराजमान होकर

श्री मनमहेश: हाथी पर सवार होकर

श्री शिवतांडव: गरूड़ रथ पर

श्री उमा-महेश: नंदी रथ पर

श्री होल्कर स्टेट का मुखारविंद: डोल रथ पर

श्री सप्तधान मुखारविंद: षष्ठम् सवारी में

सवारी के दौरान जनजातीय और लोक नृत्य कलाकारों ने अपनी आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। इसमें ढुलिया जनजाति का गुदुमबाजा नृत्य (अनूपपुर), श्रृंगारी लोक नृत्य (भुवनेश्वर), डंडा लोक नृत्य (हरदा) और बैगा जनजाति का करमा नृत्य (बालाघाट) शामिल थे। विभिन्न शहरों से आईं 70 भजन मंडलियों ने भी प्रभु का गुणगान किया, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।

भंडारे में शामिल हुए मुख्यमंत्री

राजसी सवारी में भाग लेने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव हरिफाटक ब्रिज के नीचे आयोजित भोजन वितरण भंडारे में भी शामिल हुए। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं को अपने हाथों से भोजन परोसा, जिससे यह आयोजन और भी खास बन गया।

अगले दर्शन विजयादशमी पर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि विजयादशमी के पर्व पर बाबा महाकाल एक बार फिर सवारी के साथ जनदर्शन के लिए पधारेंगे। उन्होंने बाबा महाकाल से कामना करते हुए कहा कि उनका शुभाशीष हमेशा प्रदेशवासियों पर बना रहे।

सवारी का समापन परंपरा के अनुसार रामघाट पर हुआ, जहां क्षिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल और अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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