किसके आशीर्वाद से चिरंजीवी बने राम भक्त हनुमान? पढ़ें रोचक कथा

अपने भक्तों को बल, बुद्धि और विद्या देने वाले हनुमान जी चिरंजीवी हैं. यह तो सभी जानते हैं किंतु वह चिरंजीवी कैसे बने, यह आशीर्वाद उन्हें किसने दिया शायद इस बात को बहुत कम लोग जानते हैं.

Feb 24, 2024 - 19:18
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किसके आशीर्वाद से चिरंजीवी बने राम भक्त हनुमान? पढ़ें रोचक कथा

अपने भक्तों को बल, बुद्धि और विद्या देने वाले हनुमान जी चिरंजीवी हैं. यह तो सभी जानते हैं किंतु वह चिरंजीवी कैसे बने, यह आशीर्वाद उन्हें किसने दिया शायद इस बात को बहुत कम लोग जानते हैं. हनुमान जी को रूद्र अवतार भी कहा जाता है. ब्रह्मांड में उनके सदैव बने रहने का भी एक उद्देश्य है. इसका मुख्य कारण उनके बचपन की एक घटना है जो महान बन गयी. आइए जानते हैं वह कौन सी घटना थी. 

जब सूर्य को निगलने वाले थे हनुमान...

बात उस समय की है जब हनुमान जी बहुत छोटे थे, सुबह के समय बादलों के बीच से चमकते हुए लाल रंग के सूर्यदेव को वह फल समझ बैठे और उड़ते हुए सूर्य के पास पहुंच गए. वह सूर्य को पकड़ कर निगलने ही वाले थे तभी इंद्र की दृष्टि उन पर पड़ी. इंद्र ने अपने वज्र से बाल हनुमान पर प्रहार कर दिया, प्रहार होते ही उनका संतुलन बिगड़ा और वह जमीन पर गिर पड़े. उनके पिता वायु के स्वामी पवन को इस बात की जानकारी जैसे ही हुई, उन्होंने नाराजगी में दुनिया की हवा ही रोक दी. 

ऐसे पड़ा हनुमान नाम

हवा रुकते ही पूरी दुनिया के जीव जंतु बेचैन हो उठे. इस पर सभी देवताओं ने पवन देव से पवन चलाने का अनुरोध करते हुए हनुमान जी को ठीक किया किंतु उनकी हनु यानी ठोड़ी वज्र के प्रहार से थोड़ी सी टेढ़ी हो गयी जिसके कारण उनका नाम हनुमान पड़ा. इस अवसर पर देवताओं ने हनुमान जी को बहुत सारे वरदान और शक्तियां दी जिसमें एक ब्रह्मांड के अंत तक जीवित रहने का वरदान भी दिया. 

हर युग से जुड़ा हनुमान जी का नाम

यही कारण है कि हनुमान जी का नाम त्रेता युग में प्रभु श्री राम के साथ तो जुड़ा ही है, द्वापर युग में श्री कृष्ण के साथ भी जुड़ा है. महाभारत युद्ध के समय श्री कृष्ण की सलाह पर अर्जुन उनसे सहायता मांगने गए थे तब उन्होंने उनके रथ के झंडे पर सवार रहने का आश्वासन दिया. वह कलयुग में भी हैं और इस बारे में गोस्वामी तुलसीदास जी का भी कहना है कि उन्हें प्रभु श्री राम के चरित्र की कथा तो हनुमान जी ने स्वयं सुनाई थी तभी तो वह इतनी सुंदर रचना कर सके. 

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