क्या केस ‘एक बार की उदारता’ में बंद किया जा सकता है? ऑपरेशन सिंदूर टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने ऑपरेशन सिंदूर टिप्पणी मामले में कहा कि केस को ‘एक बार की उदारता’ में बंद किया जा सकता है.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले पर अहम टिप्पणी की. यह मामला ऑपरेशन सिंदूर और सेना अफसर सोफिया कुरैशी तथा वायु सेना अफसर व्योमिका सिंह पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है.
पीठ ने क्या कुछ कहा
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले को “एक बार की उदारता” के तौर पर सम्मानजनक तरीके से दफन किया जा सकता है या बंद किया जा सकता है. हालांकि, CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय लेने का अधिकार सक्षम प्राधिकारी यानी राज्य सरकार के पास है.
चार्जशीट हो चुकी है दाखिल
यह टिप्पणी उस समय आई जब हरियाणा सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एस. वी. राजू ने अदालत को बताया कि अगस्त 2025 में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, लेकिन अब तक राज्य सरकार द्वारा अभियोजन की स्वीकृति (sanction) नहीं दी गई है. राजू ने अदालत से समय मांगा ताकि यह स्पष्ट निर्देश प्राप्त किए जा सकें कि क्या राज्य सरकार अभियोजन की अनुमति नहीं देने के पक्ष में है.
मामले को खत्म करने पर जोर
इस पर CJI ने कहा कि यदि इस मुद्दे को समाप्त किया जा सकता है तो यह उचित होगा, लेकिन संबंधित व्यक्ति को भविष्य में अधिक सतर्क और जिम्मेदार रहना चाहिए. हमें पूरा विश्वास है कि वह आगे जिम्मेदारी से आचरण करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की है
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