क्या कोई गैर हिंदू अयोध्‍या मंदिर बोर्ड का सदस्य हो सकता है, फिर वक्‍फ परिषद में क्‍यों?'

लोकसभा में अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024’ (Waqf Amendment Bill 2024) पेश किया. सदस्यों की विभिन्न आपत्तियों पर जवाब देते हुए प्रस्ताव किया कि इसे संसद की संयुक्त समिति (JPC) के पास भेजा जाए

Aug 8, 2024 - 15:45
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क्या कोई गैर हिंदू अयोध्‍या मंदिर बोर्ड का सदस्य हो सकता है, फिर वक्‍फ परिषद में क्‍यों?'

लोकसभा में अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024’ पेश किया और सदस्यों की विभिन्न आपत्तियों पर जवाब देते हुए प्रस्ताव किया कि इसे संसद की संयुक्त समिति (JPC) के पास भेजा जाए. इससे पहले विपक्षी दलों ने विरोध करते हुए कहा कि यह संविधान और संघवाद पर हमला है तथा अल्पसंख्यकों के खिलाफ है. इसकी मुखालफत करते हुए कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल ने कहा कि यह विधेयक संविधान पर हमला है. उन्होंने सवाल किया, ‘‘सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अयोध्या में मंदिर बोर्ड का गठन किया गया. क्या कोई गैर हिंदू इसका सदस्य हो सकता है. फिर वक्फ परिषद में गैर मुस्लिम सदस्य की बात क्यों की जा रही है?’’

वेणुगोपाल ने दावा किया कि यह विधेयक आस्था और धर्म के अधिकार पर हमला है. उन्होंने कहा, ‘‘अभी आप मुस्लिम पर हमला कर रहे हैं, फिर ईसाई पर करेंगे, उसके बाद जैन पर करेंगे.’’ कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि यह विधेयक महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड के चुनाव के लिए लाया गया है, लेकिन देश की जनता अब इस तरह की विभाजन वाली राजनीति पसंद नहीं करती. वेणुगोपाल ने कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे पर भी हमला है. 

समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्ला नदवी ने कहा कि मुस्लिमों के साथ यह अन्याय क्यों किया जा रहा है? उन्होंने दावा किया, ‘‘संविधान को रौंदा जा रहा है...यह आप (सरकार) बहुत बड़ी गलती करने जा रहे हैं. इसका खामियाजा हमें सदियों तक भुगतना पड़ेगा.’’ सपा सांसद ने कहा, ‘‘अगर यह कानून पारित हुआ तो अल्पसंख्यक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे... कहीं ऐसा नहीं हो जनता दोबारा सड़कों पर आ जाए.’’ 

तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि यह विधेयक अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है तथा असंवैधानिक है. उन्होंने कहा कि यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाला तथा सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ है. 

डीएमके सांसद के. कनिमोझी ने कहा, ‘‘यह दुखद दिन है. आज देख रहे हैं कि यह सरकार संविधान के खिलाफ सरेआम कदम उठा रही है. यह विधेयक संविधान, संघवाद, अल्पसंख्यकों और मानवता के खिलाफ है.’’ 

JDU ने किया बिल का समर्थन

जनता दल (यूनाइटेड) ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक मुस्लिम विरोधी नहीं है और इसे सिर्फ वक्फ संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता के लिए लाया गया है. जद(यू) के नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में कहा, ‘‘कई (विपक्षी) सदस्यों की बातों से लग रहा है कि यह विधेयक मुसलमान विरोधी है. यह कैसे मुसलमान विरोधी है?’’

उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों ने मंदिरों की बात की है, लेकिन मंदिर और संस्था में अंतर है. ललन सिंह ने कहा कि मस्जिदों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है. जद (यू) सांसद ने कहा, ‘‘वक्फ संस्था को पारदर्शी बनाने के लिए यह संशोधन लाया जा रहा है.’’

वक्फ अधिनियम संशोधन तो बहाना है, जमीन बेचना निशाना है : अखिलेश

इससे पहले सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सत्तारूढ़ भाजपा पर प्रस्तावित वक्फ अधिनियम में संशोधन की आड़ में वक्फ की जमीन बेचने की योजना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह रियल एस्टेट कंपनी की तरह काम कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी को अपना नाम बदलकर ‘भारतीय जमीन पार्टी’ रख लेना चाहिए.

यादव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘वक़्फ़ बोर्ड का ये सब संशोधन भी बस एक बहाना है. रक्षा, रेल, नज़ूल भूमि की तरह जमीन बेचना निशाना है.''

उन्होंने कहा, ‘‘वक़्फ़ बोर्ड की जमीनें, रक्षा जमीन, रेल भूमि, नज़ूल भूमि के बाद भाजपाइयों के लाभार्थ योजना की श्रृंखला की एक और कड़ी मात्र हैं. भाजपा क्यों नहीं खुलकर लिख देती : भाजपाई-हित में जारी.’’यादव ने इसी पोस्ट में मांग की कि इस बात की लिखित में गारंटी दी जाए कि वक्फ बोर्ड की जमीनें बेची नहीं जाएंगी.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा रियल स्टेट कंपनी की तरह काम कर रही है. उसे अपने नाम में ‘जनता’ के स्थान पर ‘ज़मीन’ लिखकर नया नामकरण कर देना चाहिए : भारतीय जमीन पार्टी.’’

गौरतलब है कि केंद्र की मोदी सरकार वक्फ अधिनियम में संशोधन के लिये इसी सत्र में संसद में संशोधन विधेयक ला रही है. माना जा रहा है कि संसद में संशोधन विधेयक पारित होने के बाद वक्फ बोर्ड की शक्तियां कम हो जाएंगी.

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