क्या महिलाओं को रात में गिरफ्तार किया जा सकता है? जानें- क्या कहता है कोर्ट का आदेश

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि कानून असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर रात में या सूर्योदय से पहले किसी महिला की गिरफ्तारी को रोकता है.

Mar 3, 2025 - 19:55
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क्या महिलाओं को रात में गिरफ्तार किया जा सकता है? जानें- क्या कहता है कोर्ट का आदेश

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 में कानूनी प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है. कोर्ट द्वारा कहा गया है कि गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं बल्कि निर्देशात्मक है.

उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने माना कि गिरफ्तारी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 46(4) का उल्लंघन है.

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि कानून असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर रात में या सूर्योदय से पहले किसी महिला की गिरफ्तारी को रोकता है. और कहा कि प्रावधान यह परिभाषित नहीं करता कि असाधारण स्थिति क्या होती है.

हालांकि, अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी स्थिति हो सकती है, जहां रात में महिला द्वारा जघन्य अपराध किया जाता है और मजिस्ट्रेट अनुमति प्राप्त करने के लिए उपलब्ध नहीं हो सकता है. तो ऐसी स्थिति में आरोपी महिला भाग सकती है. इसलिए, प्रक्रिया का ऐसा पालन सार्वजनिक हित को नुकसान पहुंचा सकता है.

'सलमा बनाम राज्य' के मामले का हवाला देते हुए, अदालत ने कहा कि एकल न्यायाधीश ने पहले महिलाओं की गिरफ्तारी के संबंध में दिशा-निर्देश तैयार किए थे. लेकिन खंडपीठ ने पाया कि ये दिशा-निर्देश कानून प्रवर्तन अधिकारियों को स्पष्टता प्रदान करने में अपर्याप्त हैं

पीठ ने सुझाव दिया कि राज्य विधानमंडल विधि आयोग द्वारा अपनी 154वीं रिपोर्ट में की गई सिफारिश के अनुरूप बीएनएस की धारा 43 में संशोधन करने पर विचार कर सकता है.

अदालत ने इंस्पेक्टर अनीता और हेड कांस्टेबल कृष्णवेनी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के एकल न्यायाधीश के आदेश को भी खारिज कर दिया, जिन्होंने सूर्यास्त के बाद एक महिला को गिरफ्तार किया था.

महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधान क्या है?

पुलिस द्वारा गिरफ्तारी से महिला की सुरक्षा के लिए बीएनएसएस की धारा 43(5) के तहत दो प्रावधान हैं, जो सीआरपीसी की धारा 46(4) के समान हैं. पहला, किन्हीं बेहद जरूरी परिस्थितियों को छोड़कर सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले कोई गिरफ्तारी नहीं होगी.

विशेष परिस्थितियों में एक महिला पुलिस अधिकारी को लिखित रिपोर्ट बनाकर क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी होगी. सीआरपीसी की धारा 46(4) महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शामिल किया गया एक लाभकारी प्रावधान है.

धारा 46 के सब-सेक्शन (4) के प्रावधानों की आवश्यकता दो गुना है. यदि पुलिस अधिकारी सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले महिला को गिरफ्तार करना चाहता है, तो ऐसी गिरफ्तारी के लिए बेहद जरूरी परिस्थितियां मौजूद होनी चाहिए.

सीआरपीसी की धारा 46(4) क्या है?

महिलाओं की हिरासत पर भारतीय विधि आयोग की 135वीं रिपोर्ट (1989) में सिफारिश की गई थी कि सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए. मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कोई असाधारण मामला है, तो तत्काल वरिष्ठ अधिकारी की पूर्व अनुमति लेनी होगी या अगर मामला बहुत जरूरी है, तो तत्काल वरिष्ठ अधिकारी और मजिस्ट्रेट को कारणों के साथ गिरफ्तारी रिपोर्ट देनी होगी.

1996 में विधि आयोग की 154वीं रिपोर्ट में भी इसी तरह की सिफारिशें की गई थीं और 2005 में कुछ बदलावों के साथ सीआरपीसी की धारा 46(4) को शामिल किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है?

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने राज्य को निर्देश दिया था कि वह सभी पुलिस अधिकारियों को दिए गए निर्देशों पर चर्चा करे कि किसी भी महिला को रात में या सूर्यास्त से पहले महिला कांस्टेबल की मौजूदगी के बिना गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसे मामले में सख्त अनुपालन से व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा होंगी.

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