क्या होती है प्राण प्रतिष्ठा, जिससे मूर्ति में हो जाता है देवता का वास
प्राण प्रतिष्ठा हिंदू और जैन धर्म का अनुष्ठान माना जाता है. किसी देवता की मूर्ति को मंदिर में प्रतिष्ठित करना ही प्राण प्रतिष्ठा कहलाता है.
22 जनवरी को होगी प्राण प्रतिष्ठा
मूर्ति का अतिथि की तरह होगा स्वागत
आगामी 22 जनवरी को राम मंदिर का प्रण प्रतिष्ठा समारोह होना है. इसमें कई VIP और खास लोग शामिल होंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस समारोह में शामिल होने वाले हैं. पूरे देश में प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर चर्चा हो रही है. आइए जानते हैं कि प्राण प्रतिष्ठा क्या है.
क्या है प्राण प्रतिष्ठा?
प्राण प्रतिष्ठा हिंदू और जैन धर्म का अनुष्ठान माना जाता है. प्राण-प्रतिष्ठा उस प्रक्रिया को लहते हैं, जिसमें किसी भी देवता की मूर्ति को मंदिर में प्रतिष्ठित यानी स्थापित किया जाता है. इस दौरान भजन और मंत्रों का पाठ किया जाता है. प्राण प्रतिष्ठा का शाब्दिक अर्थ जीवन शक्ति की स्थापना करना होता है
प्राण-प्रतिष्ठा से पहले होती हैं ये चीजें
प्राण प्रतिष्ठा से पहले मूर्ति को मंदिर में लाया जाता है. मंदिर के द्वार पर मूर्ति का किसी अतिथि की तरह स्वागत किया जाता है. इसके बाद मूर्ति को दूध से नहलाया जाता है. फिर मूर्ति को साफ किया जाता है. इसके बाद ही मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के योग्य मानी जाती है.
ये है प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया
मूर्ति को गर्भ गृह में रखा जाता है और पूजा शुरू होती है. इसके बाद मूर्ति का श्रृंगार कर उसे पुजारी यथास्थान पर स्थापित करते हैं. प्रतिष्ठा के दौरान मूर्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए. इसके बाद देवता को भजन, मंत्रों और पूजा-पाठ करके आमंत्रित किया जाता है.
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