क्यों मनाते हैं गोवर्धन पूजा, क्या है इसकी पौराणिक कथा जानें सबकुछ

क्या आपको पता है कि गोवर्धन पूजा क्यों मनाते हैं? इस पूजा के पीछे इसकी पौराणिक कथाएं हैं. तो आज हम आपको पौराणिक कथा से लेकर पूजा के शुभ मुहूर्त तक सबकुछ बताएंगे.

Nov 1, 2024 - 16:32
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क्यों मनाते हैं गोवर्धन पूजा, क्या है इसकी पौराणिक कथा जानें सबकुछ

हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा होता है. इस पर्व को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है. भगवान कृष्ण की पूजा के लिए इस दिन को सबसे उत्तम माना गया है. पंचांग के मुताबिक भगवान कृष्ण के नाम समर्पित यह त्योहार कार्तिक मास में मनाया जाता है. इस साल गोवर्धन पूजा 2 नवंबर को है.इस पूजा का इंतजार कृष्ण के भक्त बेसबरी से करते हैं. इस शुभ दिन को भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त हो इसके लिए भक्त जन गोवर्धन कथा का पाठ करते हैं.

कब है पूजा का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के मुताबिक इस साल गोवर्धन पूजा की तीथि की शुरुआत 1 नवंबर शाम छह बजकर 16 मिनट से शुरू होगी. तिथी का समापन शाम अगले दिन यानि कि दो नवंबर को रात 8 बजकर 21 मिनट पर होगा. ऐसे में गोवर्धन पूजा का पर्व 2 नवंबर को मनाया जाएगा. पूजा के लिए शुभ मुहूर्त की बात करें तो यह सुबह 6 बजकर 34 मिनट से लेकर 8 बजकर 46 मिनट तक रहेगा.।

भागवत पुराण की कथा

गोवर्धन पूजा को लेकर कई कथाए हैं. लेकिन जो कथा सबसे ज्यादा प्रचलित है वह भागवत पुराण की है. भागवत पुराण के मुताबिक गोकुलवासी हर साल इंद्र देव की पूजा करते थे. पूजा के बाद इंद्र देव से प्रार्थना करते थे कि राज्य में इतनी बारिश हो कि फसल अच्छी हो. लेकिन एक बार भगवान कृष्ण को इस बात की जानकारी मिली.

कृष्ण की बात मान नहीं हुई इंद्र की पूजा

जानकारी मिलने के बाद भगवान कृष्ण ने गोकुल वासियों को सलाह दी कि इस बार भगवान इंद्र की पूजा न करें. जिसके बाद सभी लोगों ने कृष्ण की बात मान ली. अपनी पूजा न होने से नाराज इंद्र देव ने राज्य में इतनी तेज वर्षा करवाई कि पूरे राज्य में पानी भर गया. राज्य में कोहराम मच गया.

इंद्रदेव को हुआ गलती का एहसास

तब भगवान कृष्ण ने राज्य के लोगों को भारी बारिश से बचाने के लिए गोवर्धन पहाड़ी को उठा लिया. भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपने हाथ की सबसे छोटी उंगली पर उठा कर इंद्र देव को अपनी दिव्य शक्तियों का अहसास करवा दिया था. जिसके बाद इंद्र देव शांत हो गए और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ. जिसके बाद सभी लोग गोवर्धन पर्वत का अहसान मान पूजा करने लगे.

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