पंडित दीनदयाल गौ संवर्धन और शोध केंद्र पर अब ताले लगने की नौबत; 10 करोड़ रुपये की लागत से हुआ था तैयार
2017 में भारतीय जनता पार्टी सरकार ने दंतेवाड़ा के टेकनार में पंडित दीनदयाल गौ संवर्धन और शोध केंद्र की नींव रखी थी. उस समय डीएमएफ और सीएसआर मद से 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई थी. तत्कालीन अधिकारियों ने दावा किया था कि यह केंद्र बस्तर में आत्मनिर्भरता का मील का पत्थर बनेगा. लेकिन आठ साल बाद तस्वीर कुछ और ही है.
दंतेवाड़ा में 10 करोड़ रुपये की लागत से बने पंडित दीनदयाल गौ संवर्धन और शोध केंद्र (Pandit Deendayal Gau Samvardhan Aur Shodh Kendra) पर अब ताला लगने की नौबत आ गई है. गायत्री परिवार समिति (Gayatri Pariwar Samiti) ट्रस्ट की तरफ से कहा गया कि विभागीय लापरवाही के चलते महज सालभर में समिति 18 लाख रुपये के कर्ज में आ गयी है. इसके चलते अब समिति ने तय किया है कि वह जिला प्रशासन को गौ संवर्धन केंद्र की चाबी लौटा देगी.
क्या है मामला?
2017 में भारतीय जनता पार्टी सरकार ने दंतेवाड़ा के टेकनार में पंडित दीनदयाल गौ संवर्धन और शोध केंद्र की नींव रखी थी. उस समय डीएमएफ और सीएसआर मद से 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई थी. तत्कालीन अधिकारियों ने दावा किया था कि यह केंद्र बस्तर में आत्मनिर्भरता का मील का पत्थर बनेगा. लेकिन आठ साल बाद तस्वीर कुछ और ही है.
12 एकड़ में फैले इस केंद्र में लैब बनाई गई, फीड प्रोसेस यूनिट लगाई गई, बोरवेल खुदवाए गए. करीब 8 करोड़ की मशीनें खरीदी गईं, मगर अब धूल खा रही हैं. कई मशीनों की पैकिंग तक नहीं खुली. इस केंद्र में इस वक्त करीब 70 गायें हैं, लेकिन दूध देने वाली सिर्फ 12. बाकी सिर्फ चारा खा रही हैं.
गायत्री परिवार समिति के सचिव के मुताबिक, पशु विभाग ना तो दवा उपलब्ध कराता है, ना ही समय पर देखभाल करता है. भूसा-दाना भी कमीशनखोरी के चलते घटिया गुणवत्ता का मिल रहा है. उन्होंने कहा कि "18 लाख रुपए से ज्यादा का कर्ज हो चुका है, न तो विभाग से मदद मिल रही है, न सहयोग. अगर समाधान नहीं हुआ तो हम केंद्र की चाबी कलेक्टर को लौटा देंगे."
साभार