पुलिस कितनी असंवेदनशील हो गई है’...बच्ची से रेप केस की जांच के तौर-तरीके से CJI भी हैरान
गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आज देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट को कड़ी फटकार लगाई, शीर्ष अदालत ने पुलिस और मजिस्ट्रेट की संवेदनहीनता पर कहा कि ये बहुत चिंताजनक है.
नई दिल्ली: गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट को कड़ी फटकार लगाई. शीर्ष अदालत ने पुलिस से तल्ख लहजे में कहा कि आप लोग कितने असंवेदनशील हो गए हैं. कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को भी कड़े शब्दों में डांट लगाते हुए कहा कि आपने मासूम बच्ची से आरोपी की मौजूदगी में बार-बार सच बोलने का दबाव बनाया. कोर्ट ने ये भी कहा कि इतने छोटे बच्चे के मामले में जिस तरह की संवेदनहीनता दिखाई गई, वह बेहद चिंताजनक है.
आरोपी के सामने कहा- सच बोलो
सुप्रीम कोर्ट ने 4 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए रेप केस में पुलिस और मजिस्ट्रेट को खूब फटकार लगाई. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल थे. पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कई गंभीर सवाल उठाए.पीठ ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि मजिस्ट्रेट ने 4 साल की बच्ची से आरोपी की मौजूदगी में सवाल पूछे और उसे बार-बार “सच बोलो-सच बोलो बोलने का दबाव बनाया.
पुलिस को खुद ही FIR दर्ज करनी चाहिए थी...
अदालत ने कहा कि पॉक्सो के मामलों में आरोपी को बच्चे के सामने या उसके करीब नहीं रखा जा सकता और ऐसे मामलों में बच्चे की सुरक्षा और संवेदनशीलता सर्वोपरि होती है. सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की भूमिका पर भी कड़े सवाल उठाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि शिकायत दर्ज नहीं भी हुई थी, तब भी पुलिस को स्वतः एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी.अदालत ने पुलिस को कड़े शब्दों में फटकार लगाते हुए कहा कि पुलिस कितनी असंवेदनशील हो गई है.
वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पीठ को बताया कि बच्ची को अलग-अलग अस्पतालों और अधिकारियों के पास ले जाया गया और मजिस्ट्रेट ने आरोपी की मौजूदगी में उससे सवाल पूछे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने परिवार से कहा कि केस आगे न बढ़ाएं, वरना उन्हें परेशानी हो सकती है
सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश
अदालत ने गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर और मामले के जांच अधिकारी को बुधवार को कोर्ट में पूरे रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है.अदालत ने यह भी आदेश दिया कि बच्ची के माता-पिता का दिया गया हलफनामा सीलबंद लिफाफे में रखा जाए. मजिस्ट्रेट की टिप्पणी भी सीलबंद लिफाफे में अदालत को भेजी जाए. कोर्ट ने निर्देश दिया कि हरियाणा सरकार महिला पुलिस अधिकारियों का पूरा विवरण अदालत को दे.
पुलिस कितनी असंवेदनशील हो गई है....
पीड़ित परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि जांच अधिकारी एक महिला हैं और वो माता-पिता से केस वापस लेने के लिए कह रही थीं. जांच अधिकारी को एक अन्य POCSO केस में रिश्वत लेने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया था. यह सुनते ही CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस कितनी असंवेदनशील हो गई है? एक तथाकथित महानगर में ऐसा हो रहा है!
सीजेआई ने आगे कहा कि आप एक सदमे से गुजर रहे बच्चे के मामले को संभाल रहे हैं.CJI ने हैरानी जताई कि पुलिस ने माता-पिता से पूछा कि वे क्या करना चाहते हैं? यह चौंकाने वाली बात है. कोर्ट ने कहा कि पुलिस इंस्पेक्टर माता-पिता से पूछ रहा है, आप क्या चाहते हैं? क्या FIR दर्ज करना उनका कर्तव्य नहीं है? क्या उन्हें कानून की बुनियादी बातें भी समझ नहीं आतीं?
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