पोलैंड और गुजरात का जामनगर.. बहुत पुरानी है कहानी, 45 साल बाद पहुंचे भारत के PM का देखिए इस्तकबाल
पीएम मोदी की तरफ से आए आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पोलैंड की मेरी यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हमारे राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं. पोलैंड मध्य यूरोप में एक प्रमुख आर्थिक साझेदार है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अपनी दो देशों की यात्रा के पहले चरण में पोलैंड पहुंचे हैं. राजधानी वारसॉ में उनका जोरदार स्वागत हुआ है. पीएम की यह यात्रा पिछले 45 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली पोलैंड यात्रा है. पिछली बार मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री रहते हुए पोलैंड गए थे. पोलैंड में अपने प्रवास के दौरान पीएम मोदी राष्ट्रपति आंद्रेज सेबेस्टियन डूडा से मिलेंगे और प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. खास बात यह है कि पोलैंड और गुजरात का एक बेहद ऐतिहासिक संबंध है. यह संबंध 70 साल से अधिक से जुड़ा हुआ है और यही दोनों देशों के संबंधों की शानदार नींव भी है.
राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 साल
पीएम मोदी की तरफ से आए आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पोलैंड की मेरी यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हमारे राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं. पोलैंड मध्य यूरोप में एक प्रमुख आर्थिक साझेदार है. रवाना होने से पहले अपने बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोकतंत्र और बहुलवाद के प्रति हमारी आपसी प्रतिबद्धता दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करती है. मैं, हमारी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए अपने मित्र प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क और राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा से मिलने के लिये उत्सुक हूं.
वारसॉ में पीएम मोदी का जोरदार स्वागत
पोलैंड की राजधानी वारसॉ में पीएम मोदी का जोरदार स्वागत हुआ है. जिस होटल में पीएम मोदी ठहरे हैं, वहां भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका स्वागत किया. इस दौरान प्रधानमंत्री ने बच्चों से हाथ भी मिलाया. मोदी के स्वागत में डांडिया नृत्य की प्रस्तुति हुई. PM मोदी के स्वागत में तिरंगा लेकर इंतजार कर रहे भारतीय समुदाय के लोग काफी खुश दिखाई दिए. इस बीच वारसॉ में नवागढ़ के महाराज के मेमोरियल पर मोदी के स्वागत की तैयारियां भी जोरों पर चल रही हैं. आइए इसके बारे में भी जानते हैं.
भारत और पोलैंड का बहुत पुराना रिश्ता
असल में भारत और पोलैंड का बहुत पुराना रिश्ता है. यह कहानी दूसरे विश्व युद्ध के समय की है. हिटलर ने पोलैंड पर जब आक्रमण किया तो वहां सैनिकों ने महिलाओं और बच्चों को एक जहाज में बिठाकर रवाना कर दिया. ये जहाज गुजरात के जामनगर पहुंचा जहां तत्कालीन महाराजा दिग्विजय सिंह रणजीत सिंह ने इन सबको शरण दी और उनकी देखभाल हुई. कई साल तक ऐसा हुआ. इनमें ज्यादातर बच्चे और महिलाएं थीं. हजारों पोलिश बच्चों को महाराजा ने 1942 से 1946 तक राज्य में सुरक्षित रखा.
जामनगर के महाराजा और पोलैंड का रिश्ता
आगे चलकर पोलैंड ने इस बात को सहेजकर रखा. पोलैंड में आज के समय में 8 स्कूलों के उन्हीं राजा साहब के नाम पर है. इतना ही नहीं एक बड़ा चौराहा गुड महाराजा चौराहा के नाम से भी पोलैंड की राजधानी में है. महाराजा के प्रति पोलैंड कृतज्ञ रहता है. जामनगर के महाराजा को पोलैंड के लोग इतने सम्मान से देखते हैं कि उनकी तस्वीर वाली टीशर्ट पहनते हैं.
#WATCH | Prime Minister Narendra Modi greets members of the Indian diaspora, in Warsaw, Poland
PM Modi is on a two-day official visit to Poland. This is the first visit by an Indian Prime Minister to Poland in the past 45 years. pic.twitter.com/sYBG4FKTaW — ANI (@ANI) August 21, 2024
यह संयोग ही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी गुजरात राज्य से आते हैं, जहां पोलैंड के लोगों को शरण मिली थी. इससे पहले भी पिछली बार भारत के जो पीएम पोलैंड गए हुए थे, वे भी गुजरात से थे, मोरारजी देसाई. ऐसे में पीएम मोदी की इस यात्रा पर निगाहें बनी हुई हैं. अपने बयान में पीएम मोदी ने कहा है कि मैं पोलैंड में जीवंत भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ भी बातचीत करूंगा.
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