फुस्स हो गए मायावती के उत्तराधिकारी, हरियाणा के बाद अब दिल्ली में गिरा बसपा का ग्राफ

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 27 साल बाद सत्ता हासिल कर ली है, आम आदमी पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ा. इस चुनाव में बसपा का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. बीएसपी पार्टी एक भी सीट जीतने में नाकाम रही और 50 से ज्यादा उम्मीदवार 1,000 वोट भी नहीं जुटा पाए. यानी मायावती के भतीजे और नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद का दिल्ली चुनाव में कोई कमाल नहीं दिखा.

Feb 10, 2025 - 16:43
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फुस्स हो गए मायावती के उत्तराधिकारी, हरियाणा के बाद अब दिल्ली में गिरा बसपा का ग्राफ

भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में शानदार जीत दर्ज की है. पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी को करारा झटका देते हुए करीब 27 साल के बाद सत्ता में वापसी की. वहीं, बहुजन समाज पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन जैसी पार्टियां एक प्रतिशत वोट भी हासिल करने में नाकाम रहीं. हालांकि किसी जमाने में दिल्ली में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने वाली पार्टी बीएसपी इन चुनावों में AIMIM और JDU जैसी सीटों से भी कम वोट ला पाई. 

मायावती के भतीजे दिल्ली में नहीं बढ़ा पाए ग्राफ

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के गिरते जनाधार को संभालने के लिए मायावती ने अपने भतीजे और नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को कमान दी है. लेकिन हरियाणा के बाद दिल्ली के विधानसभा चुनाव में वह खाता खोलने में भी सफल नहीं हो सके. वह कोई कमाल नहीं दिखा सके हैं. दिल्ली में पार्टी का ग्राफ और गिर गया है. दरअसल, बसपा मुखिया मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर और उत्तराधिकारी बनाकर पार्टी को पूरे देश में मजबूत करने की जिम्मेदारी दी है. बसपा को हरियाणा के बाद दिल्ली से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन यह खरे नहीं उतर सके.

मायावती का क्या था रिएक्‍शन

बसपा मुखिया मायावती ने इसके लिए किसी को जिम्मेदार नहीं माना है. उन्होंने कहा कि "हवा चले जिधर की, चलो तुम उधर की" भाजपा की सरकार दिल्ली में बना दी है. भाजपा के पक्ष में लगभग एकतरफा होने से बसपा सहित दूसरी पार्टियों को काफी नुकसान सहना पड़ा है. वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि हरियाणा, महाराष्ट्र-झारखंड के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी बसपा का खाता नहीं खुल सका. पार्टी के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद भी कुछ नहीं कर सके. उन्होंने बताया कि लगातार बसपा के गिर रहे जनाधार को बढ़ाने के लिए बसपा ने नए उभरते हुए दलित नेता चंद्रशेखर के खिलाफ आकाश आनंद को खड़ा करने की कोशिश की है. क्योंकि युवा दलित मतदाता चंद्रशेखर की तरफ आकर्षित हो रहा है. उसे रोकने और युवाओं में पैठ बढ़ाने के लिए मायावती ने आकाश को लॉन्च तो किया है, लेकिन अभी तक कुछ खास हो कर नहीं पाए. न ही वोट बैंक बढ़ाने में, न संगठन को मजबूती देने में.बसपा का हर राज्य में गिरता जा रहा ग्राफ

अभी हाल में यूपी में हुए उपचुनाव में भी महाराष्ट्र व झारखंड विधानसभा चुनाव में भी बसपा को पराजय का ही सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में बसपा का ग्राफ पहले के चुनाव की अपेक्षा काफी कम हुआ है. लगातार गिरते ग्राफ का असर आगे के चुनाव में पड़ सकता है. इसके लिए पार्टी को कोई अलग रणनीति अपनानी पड़ सकती है. पहले हरियाणा-जम्मू-कश्मीर, फिर महाराष्ट्र-झारखंड और अब दिल्ली में बसपा का लचर प्रदर्शन पार्टी के लिए अस्तित्व का संकट बढ़ाने वाला भी हो सकता है

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