बहुत हो गए पीर, दरगाह और... अतिक्रमण से नाराज हाईकोर्ट बोला- बहाल करिए दिल्ली के 'फेफड़े', जानिए पूरा मामला
दिल्ली हाई कोर्ट ने जंगलों में धार्मिक ढांचों के नाम पर अतिक्रमण (Encroachment) और गैर कानूनी निर्माणों को लेकर नाराजगी जताई है. कोर्ट ने कहा कि जंगल "दिल्ली के हरित फेफड़े" हैं, उन्हें बहाल किया जाना चाहिए.
उत्तराखंड के हल्द्वानी (Haldwani Violence) शहर में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के बाद थाने में घुसकर पत्थरबाजी, हिंसा, आगजनी और तनाव से पहले दिल्ली में मुस्तैदी से जंगल में अवैध कब्जे को हटाया गया. दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने एक सुनवाई में अतिक्रमण को डकैती के समान बताया तो उससे पहले एक मामले में कहा कि देश में पीर, दरगाह और मंदिर पर्याप्त से ज्यादा हैं.
हमारे देश में पीर, दरगाह, मंदिर बहुत हो गए हैं
महरौली में 700 साल पुराना बताए जा रहे एक दरगाह को हटाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि हमारे देश में पीर, दरगाह, मंदिर बहुत हो गए हैं. संरक्षित स्मारकों को छोड़कर वन क्षेत्र या वन भूमि पर किसी भी तरह के निर्माण को अनुमति नहीं दी जा सकती है. अगर आप शहर में सांस नहीं ले पाएंगे, तो विरासत का आनंद कैसे लेंगे? लोगों को सांस लेने दीजिए.
जंगलों में अतिक्रमण को लेकर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि जंगल "दिल्ली के हरित फेफड़े" हैं और प्रदूषण से एकमात्र रक्षक हैं. उन्हें बहाल किया जाना चाहिए.
धार्मिक संरचनाओं के नाम पर अतिक्रमण पर चिंता
दिल्ली हाई कोर्ट ने धार्मिक संरचनाओं के नाम पर अतिक्रमण समेत अनधिकृत निर्माणों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि शहर में पर्याप्त धार्मिक स्थल हैं. इसलिए इन जमीन को जंगलों को बहाल करने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए. शहर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर कोर्ट ने कहा कि लोग राष्ट्रीय राजधानी में सांस नहीं ले पा रहे हैं और प्रदूषण के कारण मर रहे हैं. इसलिए किसी को भी वन क्षेत्रों में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती. उन्हें बेदखल किया जाना चाहिए.
एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और मनप्रीत सिंह अरोड़ा की बेंच ने क्या कहा
एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और मनप्रीत सिंह अरोड़ा की बेंच ने कहा, "जंगलों को बहाल करने दीजिए. आज आपको अधिक जंगल कहां मिलेंगे? इसलिए मौजूदा जंगलों को संरक्षित किया जाना चाहिए. यह दिल्ली के हरे फेफड़े हैं. दिल रखें, इंसान बनें. समझें कि लोग प्रदूषण के कारण मर रहे हैं. यह हमारा एकमात्र रक्षक है. यह हमारा आखिरी गढ़ है."
क्या है महरौली के आशिक अल्लाह दरगाह का मामला
हिमांशु दामले और एक अन्य व्यक्ति द्वारा दायर चाचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कमेंट किया था. याचिका में मांग की गई थी कि दिल्ली में प्राचीन स्मारकों, खासकर महरौली में आशिक अल्लाह दरगाह को ढहने से बचाया जाए. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि दरगाह 1317 ईस्वी की है. यह देश की सबसे पुरानी और सबसे महत्वपूर्ण सल्तनत युग की संरचनाओं में से एक है. इसमें 13वीं शताब्दी के सूफी संत बाबा फरीद की चिल्लागाह भी शामिल है.
पहले अतिक्रमण होता है फिर समय के साथ उसका विस्तार
हालांकि, दरगाह की तस्वीरों को देखते हुए बेंच ने कहा कि ये वहां की संरचना पर लगाई गई नई टाइलें हैं. इसे एक दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित किया गया है. जिससे अधिक लोग आते हैं. हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में इस ओर भी ध्यान दिलाया कि कैसे अतिक्रमण होता है और समय के साथ उसका विस्तार किया जाता है. इसके जवाब में याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि सैकड़ों वर्षों से अगर किसी जगह का इस्तेमाल पूजा स्थल के रूप में किया जाता रहा है तो जाहिर तौर पर उसमें बदलाव होते रहते हैं.
दरगाह को जंगलों से पुराना बताना और नारा लगाना गलत
याचिकाकर्ताओं के वकील ने दावा किया कि वह 800 साल पुराने स्थलों के बारे में बात कर रहे हैं. वे इन जंगलों से भी पुराने हैं. हालांकि, बेंच इससे सहमत नहीं हुई. बेंच ने कहा कि यह बहुत अनुचित है और इस सब को एक तरह का "नारा" दिया जा रहा है. बेंच ने कहा, "हम वन क्षेत्र को साफ करवा रहे हैं ताकि लोग दिल्ली में सांस ले सकें. यहां बहुत प्रदूषण है. इनमें से कुछ से स्पष्ट है कि ये नई संरचनाएं हैं. यह सब अतिक्रमण है. ये टाइलें 10 साल पहले भी दिल्ली में थीं. निश्चित रूप से इस प्रकार की टाइलें 16वीं शताब्दी में नहीं थीं."
संजय वन हरित क्षेत्र में चार मंदिरों को भी डीडीए ने हटाया
हाई कोर्ट ने कहा, "अगर कुछ पवित्र पाया जाता है तो हम उन्हें इसे संरक्षित करने का निर्देश देंगे, लेकिन किसी को भी वहां रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी. हर कोई बाहर चला जाएगा नहीं तो पूरा जंगल अशांत हो जाएगा." वहीं, डीडीए की ओर से पेश वकील ने कहा कि संजय वन में हरित क्षेत्र पर पूरी तरह से अतिक्रमण कर लिया गया है और प्राधिकरण ने आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद चार मंदिरों सहित विभिन्न संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया है.
दो करोड़ की आबादी वाले दिल्ली में साल भर खतरनाक मौसम
दो करोड़ की आबादी वाला दिल्ली शहर साल भर खतरनाक मौसम का सामना करता है. चिलचिलाती गर्मी से लेकर मूसलाधार बारिश और सर्दी शुरू होने से पहले शहर के लोग जहरीली धुंध का सामना करते हैं. वायु प्रदूषण को लेकर हर साल दिल्ली में तरह-तरह के नियम बनाए जाते हैं, लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकलता. प्रदूषण के कारण शहर में हवा खराब हो जाती है और लोगों को बाहर निकलने पर मास्क लगाना पड़ता है.
दुनिया के सबसे खराब एक्यूआई वाले शहर में दिल्ली का नाम
हवा की गुणवत्ता को 0 से 500 के स्केल पर नापा जाता है. 0 से 50 के बीच एयर क्वॉलिटी को अच्छा माना जाता है, जबकि 300 से ऊपर यह बेहद खतरनाक होती है. दिल्ली में हर साल एक्यूआई 300 से ऊपर दर्ज किया जाता है. इससे शहर के लोगों में तरह-तरह की बीमारियां होती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि वायु प्रदूषण से हर साल दुनिया भर में
42 लाख लोगों की मौत हो जाती है.
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