भावान्तर योजना लागू करने वाला MP पहला राज्य; जानिए मोहन कैबिनेट के अहम फैसले

सरकार का कहना है कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों विशेषकर मालवा, महाकौशल और ग्वालियर-चंबल में विकास के प्रयास लगातार जारी हैं. कैबिनेट ने सरदार सरोवर परियोजना के कारण पिछले 25 वर्षों से रजिस्ट्री से वंचित आदिवासी परिवारों के लिए बड़ा फैसला लिया है.

Feb 3, 2026 - 17:36
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भावान्तर योजना लागू करने वाला MP पहला राज्य; जानिए मोहन कैबिनेट के अहम फैसले

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (CM Dr Mohan Yadav) की अध्यक्षता में मंगलवार 3 फरवरी को मंत्रालय में हुई कैबिनेट (Cabinet Meeting Madhya Pradesh) की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. इस बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री चैतन्य कश्यप ने पत्रकारों को विस्तृत जानकारी दी. सरकार ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने भावान्तर योजना (Bhavantar Bhugtan Yojana) को पूरी तरह लागू करते हुए किसानों को बड़े पैमाने पर लाभ पहुंचाया है. कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में पिछले दो वर्षों में सिंचाई का रकबा लगातार बढ़ रहा है.

भावान्तर योजना में किसानों को बड़ी राहत

मंत्री कश्यप के अनुसार, अब तक 7 लाख 10 हजार से अधिक किसानों को 1500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का वितरण किया जा चुका है. इसके अलावा राज्य सरकार ने अलग से जानकारी दी कि पिछले चक्र में 7 लाख किसानों को कुल 15 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है और यह राशि किसानों तक दो महीने के भीतर पहुंचाई गई.

महाकाल लोक की तर्ज पर ‘पशुपतिनाथ लोक' का लोकार्पण

बैठक में बताया गया कि महाकाल लोक की तर्ज पर पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण भी किया गया है. वहीं 30 जनवरी को आयोजित पुष्प महोत्सव में 40 हजार किसानों ने हिस्सा लिया और यह आयोजन लगभग 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सक्रिय कृषि कार्यों से जुड़ा हुआ था.

मालवा, महाकौशल, ग्वालियर-चंबल क्षेत्रों पर विशेष जोर

सरकार का कहना है कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों विशेषकर मालवा, महाकौशल और ग्वालियर-चंबल में विकास के प्रयास लगातार जारी हैं. कैबिनेट ने सरदार सरोवर परियोजना के कारण पिछले 25 वर्षों से रजिस्ट्री से वंचित आदिवासी परिवारों के लिए बड़ा फैसला लिया है.

लगभग 25,200 परिवारों को पहले पट्टे दिए गए थे, लेकिन उनकी रजिस्ट्री नहीं हो पा रही थी. सरकार ने अब इन पट्टों की रजिस्ट्री मुफ्त में करने का निर्णय लिया है. इससे सरकार पर लगभग 600 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा. यह क्षेत्र 8000 हेक्टेयर से अधिक में फैला है.

सरकार का कहना है कि यह निर्णय बिना किसी भेदभाव के लिया गया है.

बाणसागर परियोजना में दो नई सिंचाई योजनाएँ स्वीकृत

मंत्रिमंडल ने बाणसागर बांध परियोजना से जुड़ी दो नई योजनाओं को मंजूरी दी है. फिलहाल मध्यप्रदेश इस परियोजना के पानी का 60–65% उपयोग करता है.

धनवाही लिफ्ट इरीगेशन योजना

लागत: 53 करोड़ रुपयेसिंचाई क्षेत्र: 3300 हेक्टेयर

बरही सिंचाई परियोजना (कटनी जिले के बरही–विजयराघवगढ़ क्षेत्र में विस्तार)

लागत: 566 करोड़ रुपयेसिंचाई क्षेत्र: 20 हजार हेक्टेयरलाभान्वित किसान: 11 हजार

सरकार ने दावा किया कि 2003 तक मध्यप्रदेश में मात्र 7.25 लाख हेक्टेयर सिंचाई होती थी, जो अब कई गुना बढ़ाई गई है.

कई योजनाओं की अवधि बढ़ाई गई

कैबिनेट में वित्त विभाग की 8 योजनाओं सहित कई अन्य योजनाओं की अवधि साल 2026–27 से 2030–31 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया. इनमें प्रमुख योजनाएँ शामिल हैं

सम्बल योजना 2030-31 तक बढ़ाई गईगौ संवर्धन योजना की अवधि बढ़ीकिशोर कल्याण द्वितीय योजना की अवधि बढ़ीघरेलू हिंसा निवारण क्षमता योजना की अवधि बढ़ाई गई

इन सभी योजनाओं की बढ़ी हुई अवधि से राज्य पर कुल 15,009 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा.

राज्य समाज कल्याण बोर्ड भंग, कर्मचारियों का संविलियन

कैबिनेट ने राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग करने का निर्णय भी लिया. बोर्ड के कर्मचारियों का महिला एवं बाल विकास विभाग में संविलियन स्वीकृत कर दिया गया है.

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