यूपी में कैसे चुपचाप कानून बनने के करीब पहुंचा 'विस्फोटक' नजूल बिल, ऊपरी सदन में पास कराने में क्यों हो रही देरी?

योगी सरकार ने 7 मार्च, 2024 को उस अध्यादेश को अधिसूचित किया था जिसने नजुल जमीन को किसी निजी व्यक्ति के पक्ष में फ्रीहोल्ड में बदलने पर रोक लगा दी. इस अध्यादेश का मकसद भू-माफियाओं और दूसरे लोगों द्वारा पट्टा नियमों का उल्लंघन कर हड़पी गई जमीन को वापस लेना भी था.

Aug 3, 2024 - 20:25
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यूपी में कैसे चुपचाप कानून बनने के करीब पहुंचा 'विस्फोटक' नजूल बिल, ऊपरी सदन में पास कराने में क्यों हो रही देरी?

उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने बतौर विधान परिषद सदस्य अपनी ही सरकार द्वारा यूपी विधानसभा में पेश किए गए नजूल संपत्ति (सार्वजनिक प्रयोजन के लिए प्रबंधन और उपयोग) विधेयक 2024 को उच्च सदन की एक चयन समिति के पास भेज दिया. शुरू में इसे यूपी में चल रहे सरकार बनाम संगठन का एक और मामले के रूप में समझा जा रहा था. हालांकि, बारीकी से जांच करने पर पता चला है कि इस मुद्दे पर किसी भी विपक्षी हमले को कुंद करने के लिए यह भाजपा का एक सुनियोजित कदम था.

योगी सरकार ने 7 मार्च, 2024 को अधिसूचित किया था नजूल पर अध्यादेश

इस मामल में सबसे पहले योगी सरकार ने 7 मार्च, 2024 को उस अध्यादेश को अधिसूचित किया, जिसने नजूल जमीन को किसी निजी व्यक्ति के पक्ष में फ्रीहोल्ड में बदलने पर रोक लगा दी थी. इसका मकसद भू-माफियाओं, अन्य लोगों और पट्टा नियमों का उल्लंघन करने वालों से हड़पी गई जमीन को वापस लेना था. हालांकि, धीरे-धीरे यह स्पष्ट हो गया कि इसका प्रभाव भू-माफियाओं द्वारा कब्ज़ा किए गए जमीन के टुकड़ों से कहीं आगे तक जा पहुंचा है

यूपी विधानसभा में अपन-पराए के विरोधों के बावजूद नजूल विधेयक पास

भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा, ''उदाहरण के लिए, प्रयागराज शहर का एक बड़ा हिस्सा नजूल जमीन पर बसा हुआ है.'' इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि जब विधानसभा ने बुधवार को विधेयक पारित किया तो इसके खिलाफ बोलने वालों में प्रमुख रूप से प्रयागराज से भाजपा विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह और हर्षवर्द्धन बाजपेयी शामिल थे. उनके बाद ड़ोसी जिले प्रतापगढ़ से दो विधायक राजा भैया (जेडी-एल) और आराधना मिश्रा (कांग्रेस) थे. एनडीए के सहयोगियों ने भी विधेयक पर आपत्ति जताई.

इलाहाबाद लोकसभा सीट हारने का एक बड़ा कारण था नजूल पर अध्यादेश

भाजपा के एक सदस्य ने बताया कि लगभग 50,000 परिवार अध्यादेश से नाराज थे और यह पार्टी की इलाहाबाद लोकसभा सीट हारने का एक बड़ा कारण था. एक भाजपा विधायक ने कहा, ''सिर्फ प्रयागराज में ही नहीं बल्कि अन्य जिलों में भी नाराजगी पनप रही थी. क्योंकि ऐसे नजूल जमीन धारकों की संख्या लाखों में है.'' लोकसभा चुनाव 2024 नतीजे के बाद पहले से ही बैकफुट पर चल रही भाजपा को एहसास हुआ कि यह विधेयक आगामी उपचुनावों में उसकी संभावनाओं पर उल्टा असर डाल सकता है.

सीएम योगी, दोनों डिप्टी सीएम, संसदीय कार्य मंत्री और भाजपा अध्यक्ष का फैसला

इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक, यूपी भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना इस मामले से एक सम्मानजनक निकास का रास्ता खोजने के लिए जुट गए. भाजपा के एक विधायक ने कहा कि पहला कदम यह सुनिश्चित करना था कि सपा को विरोध का मौका दिए बिना इसे निचले सदन में पारित किया जाए. उन्होंने दावा किया, ''भाजपा विधायकों द्वारा उठाई गई आपत्तियां इसी कदम का हिस्सा थीं.''

प्रवर समिति को विधेयक भिजवाने के लिए विधान परिषद में अपनों का एतराज

इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि विधान परिषद में भाजपा सदस्य को विधेयक पर आपत्ति जतानी चाहिए और फिर भूपेंद्र चौधरी इसे प्रवर समिति को भेज सकते हैं. यह पूछे जाने पर कि जब अध्यादेश का ही विरोध हो रहा था तो विधेयक क्यों पेश किया गया, एक भाजपा विधायक ने कहा कि विरोध मुख्य रूप से प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों तक ही सीमित था. उन्होंने कहा, "यह सोचा गया था कि आपत्तियों को संशोधन के जरिए संबोधित करने के बाद आगे का रास्ता निकाला जाएगा."

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