रामलला को पंचामृत नहीं मधु-पर्क से कराया जा रहा स्नान, इस कारण लिया गया ये फैसला

मौसम में दिनों-दिन आ रहे बदलाव को देखते हुआ आयोध्या के राम मंदिर में स्थापित रामलला की नित्य सेवाओं में कुछ बदलाव किए गए हैं. जानें इस दौरान किन-किन चीजों को बदला गया है.

Mar 7, 2024 - 17:14
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रामलला को पंचामृत नहीं मधु-पर्क से कराया जा रहा स्नान, इस कारण लिया गया ये फैसला

कड़ाके के ठंड भले ही जा चुकी है, लेकिन मौसम रोजाना आ रहे बदलाव आजकल बीमारी का कारण बना हुआ है. मौसम में नित्य आ रहे बदलावों को देखते हुए अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला की नित्य सेवाओं में बदलाव किया गया है. बता दें कि ये बदलाव मौसम में आ रहे बदलावों को देखते हुए किया गया है. अभी किसी दिन तेज धूप हो जाती है, तो कभी एकदम से ठंडी बर्फीली हवाएं चलने लगती हैं. 

इतना ही नहीं, दिन में तापमान ज्यादा और रात में कम हो जाने से रामलाल के बीमार होने का रिस्क बढ़ गया है. ऐसे में मंदिर परिसर ने रामलला की नित्य सेवाओं में कुछ बदलाव करने का फैसला लिया है. उनके राग-भोग का इस समय विशेष ध्यान रखा जा रहा है. इतना ही नहीं, उन्हें पंचामृत की जगह मधु-पर्क से स्नान कराया जा रहा है. वहीं,भोग में उन्हें मौसमी फल, केसर युक्त दूध और ड्राई फ्रूट्स आदि दिए जा रहे हैं. 

बता दें कि रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सतेंद्र दास ने बताया कि मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद ऐसा माना जाता है कि उनमें प्राण हैं. इसलिए उसी तरह से उनका ध्यान रखा जता है. बता दें कि राममंदिर में रामलाल पांच साल के बालक के रूप में विराजमान किया गया है. वे राजकुमार भी हैं. ऐसे में रामलला की नित्य सेवा बालक के रूप में राजसी ढंग से की जाती है. मौसम में आ रहे उतार-चढ़ाव के चलते रामलला कहीं बीमार न हो जाएं, इसलिए उनका विशेष ख्याल रखा जाता है. उन्हें सुबह सबसे पहले मधु-पर्क से स्नान कराया जाता है. 

ऐसे तैयार होता है मधु-पर्क

बता दें कि मधु-पर्क गाय का दूध, गाय का घी, गाय का दही, मधु और शक्कर से मिलाकर तैयार किया जाता है. सुबह 4 बजे रामलला को इसी से स्नान कराया जाता है. बता दें कि रामलला को पहले पंचामृत से स्नान कराया जाता था. इसके बाद उन्हें भोग में सीजन के फल, पेड़ा आदि अर्पित किए जाते हैं. वहीं, सुबह श्रृंगार आरती के बाद उन्हें रबड़ी, किशमिश, छुआरा, बादाम आदि का भोग लगाया जाता है. रामलला को सुबह 9 बजे बाल भोग लगाया जाता है. मंदिर के पुजारी ने बताया कि अब सर्दी लगभग जाने को है, इसलिए रामलला को रजाई की जगह रात में पशमीना शॉल ओढ़ाई जाती है. 

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