राहुल गांधी की 'चूक' ममता के लिए बन गई अब बड़ी चुनौती, PM मोदी ने रेखा पात्रा को यूं ही नहीं बना दिया चुनावी चेहरा
मुंह से निकला हुआ कोई शब्द कब राजनीति में बड़ी परेशानी का कारण बन जाए, कोई कह नहीं सकता. ऐसी ही राहुल की एक चूक अब सीएम ममता बनर्जी के लिए मुसीबत की वजह बन गई है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक चूक पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गई है. पीएम मोदी की लीडरशिप में पूरी बीजेपी अब राहुल की उस चूक को आधार बनाकर पश्चिम बंगाल का रण जीतने में जुटी हुई है. इसी रणनीति के तहत पीएम मोदी ने आज बशीरहाट सीट से बीजेपी प्रत्याशी बनाई गईं संदेशखाली पीड़िता रेखा पात्रा से फोन पर बात की और उन्हें शक्तिस्वरूपा की उपाधि दी. पीएम ने कहा कि वे अपने संघर्ष से बंगाल में एक नया इतिहास रचने जा रही हैं.
राहुल गांधी ने कहां कर दी चूक?
बीजेपी ने बंगाल में यह चुनाव दांव यूं नहीं चला है. इसके पीछे गहरी रणनीति छिपी है. सबसे पहले आपको राहुल गांधी की उस चूक के बारे में बताते हैं, जो अब कांग्रेस और टीएमसी दोनों के लिए गले की हड्डी बन गई है. असल में राहुल गांधी ने अपनी एक पोस्ट में मोदी सरकार की जमकर आलोचना की थी. उस पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'उस शक्ति को मैं पहचानता हूं, उस शक्ति को नरेंद्र मोदी जी भी पहचानते हैं, वह किसी प्रकार की कोई धार्मिक शक्ति नहीं है, वह अधर्म, भ्रष्टाचार और असत्य की शक्ति है. इसलिए जब-जब मैं उसके खिलाफ आवाज उठाता हूं, मोदी जी और उनकी झूठों की मशीन बौखलाती है, भड़क जाती है.'
बीजेपी ने चालाकी से घुमा दिया अर्थ
राहुल गांधी ने इस बयान में शक्ति पावर शब्द का इस्तेमाल मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार और झूठ बोलने के आरोप के लिए किया था लेकिन बीजेपी ने इसका अर्थ घुमाकर इसे शक्ति यानी देवी के लिए कर दिया. पीएम मोदी समेत बीजेपी के तमाम नेता अपनी हरेक रैलियों में 'शक्ति' को मुद्दा बनाकर कांग्रेस और इंडी गठबंधन के दूसरे दलों पर हमला बोल रहे हैं. तमिलनाडु के सेलम में हुई जनसभा में पीएम मोदी ने शक्ति भारत की आस्था और संस्कृति की प्रतीक है. यह हमारी देवियों और महिलाओं की अस्मिता का प्रतीक है. राहुल गांधी ने शक्ति को अधर्म का प्रतीक बताकर देशभर की महिलाओं का अपमान किया है.
शक्ति के विनाशक और उपासक में चुनाव
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि राहुल गांधी, उदयनिधि स्टालिन, ए राजा समेत विपक्षी नेता केवल हिंदू आस्था के प्रतीकों के खिलाफ बोलते हैं. दूसरे धर्मों के खिलाफ उनके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकलता है. ऐसा करके वे हिंदू धर्म के प्रति अपनी नफरत का इजहार करते हैं. उन्होंने कहा कि आने वाला लोकसभा चुनाव 'शक्ति के विनाशक' और 'शक्ति के उपासक' के बीच होगा. जनता इस चुनाव में शक्ति के विनाश की चाह रखने वालों को औकात बता देगी.
बंगाल में शक्ति पर क्यों खेल रही बीजेपी?
आप पीएम मोदी के इन बयानों से अंदाजा लगा सकते हैं कि बीजेपी इस मुद्दे पर किस कदर फ्रंटफुट पर खेल रही है. पार्टी के रणनीतिकारों ने सोच-विचार के बाद 'शक्ति' को पश्चिम बंगाल चुनाव में अपनी स्ट्रेटजी का केंद्र बना लिया है. इसकी वजह ये है कि बंगाल के अधिकतर लोग हिंदू हैं और दुर्गा माता यानी शक्ति के उपासक हैं. ऐसे में शक्ति शब्द का इस्तेमाल कर बीजेपी लोगों को संदेश देना चाह रही है कि कांग्रेस-टीएमसी हिंदुओं की आस्था, भारतीय संस्कृति और महिलाओं के विरोधी हैं और उनका नाश करना चाहते हैं.
रेखा पात्रा को उम्मीदवार बनाकर बड़ा संदेश
अपनी इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने संदेशखाली पीड़िता रेखा पात्रा को बशीरहाट लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है. रेखा पात्रा ने ही दूसरी महिलाओं के साथ मिलकर संदेशखाली में लोगों की जमीनें कब्जाने और महिलाओं के यौन शोषण में शामिल टीएमसी नेता शाहजहां शेख के खिलाफ आंदोलन किया. जिसके बाद यह राष्ट्रीय मुद्दा बन गया और हाईकोर्ट के आदेश के बाद शाहजहां के अरेस्ट कर लिया गया.
क्या निशाने पर लगेगा बीजेपी का दांव?
पीएम मोदी ने आज फोन पर बातचीत के दौरान रेखा पात्रा को जब शक्तिस्वरूपा कहा तो उनका अर्थ साफ था कि वे उत्पीड़न, अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने वाली हरेक महिला और आम लोगों के साथ बीजेपी खड़ी है. उन्होंने अपने इस दांव से ममता बनर्जी को हिंदू विरोधी और महिलाओं पर अत्याचार करने वालों की समर्थक भी सिद्ध करने का प्रयास किया. अब देखने लायक बात होगी कि बीजेपी का यह दांव कितना निशाने पर लगता है और वहां पार्टी कितनी सीटें जीत पाती है.
अगर वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें बीजेपी ने राज्य की 42 सीटों में से 18 पर जीत हासिल की थी. इसके बाद राज्य में हुए असेंबली चुनाव में उसने 70 सीटें जीतीं और राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी बन गई.
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