वैशाख मास में शिवलिंग के ऊपर क्यों लटकाया जाता है कलश, जानें रहस्य
वैशाख का महीना चल रहा है. पैराणिक मान्यता और परंपरा के अनुसार, इस महीने में शिवलिंग के ऊपर छोटा घड़ा लटकाया जाता है. आइए जानते हैं कि आखिर शिवलिंग के ऊपर गलंतिका क्यों लटकाया जाता है और इसका समुद्र मंथन से क्या कनेक्शन है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस समय वैशाख का महीना चल रहा है, जिसकी शुरुआत 13 अप्रैल से हो चुकी है. कहते हैं कि इस पवित्र महीने में तीर्थों में स्नान करने के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व है. आपने देखा होगा कि वैशाख मास में शिवलिंग के ऊपर एक छोटा कलश बांधा जाता है. शिवलिंग के ऊपर जो छोटा कलश बांधा जाता है उसे गलंतिका कहते हैं. गलंतिका एक छोटी मटकी होती है, जिसके नीचे एक छोटा छेद बना होता है, जिससे जरिए बूंद-बूंद पानी शिवलिंग पर टपकता रहता है. ऐसे में चलिए जानते है कि वैशाख मास में शिवलिंग के ऊपर छोटी मटकी क्यों लटकाई जाती है और इससे जुड़ी मान्यताएं क्या हैं.
समुद्र मंथन से जुड़ी है कथा
शास्त्रों में वर्णित पौराणिक कथा के मुताबिक, समुद्र मंथन के बाद एक विष का प्याला भी निकला था. इससे चारों ओर हाहाकार मच गया था. उस वक्त भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में समा लिया था. पौराणिक मान्यता है कि वैशाख मास में जब गर्मी बहुत अधिक बढ़ जाती है तो भगवान शिव के गले में मौजूद विष की वजह से उनके शरीर का तापमान बढ़ने लगता है. इसलिए इस तापमान को नियंत्रित करने के लिए वैशाख मास में शिवलिंग के ऊपर गलंतियां बांधने की परंपरा है. इससे बूंद-बूंद पानी टपकता रहता है, जिससे शिवजी का शरीर ठंडा रहा रहता है.
ये भी है वजह
खासतौर पर वैशाख और ज्येष्ठ में बहुत अधिक गर्मी पड़ती है. ऐसे में शिवलिंग पर इसलिए भी गलंतिका बांधी जाती हैं क्योंकि शिवलिंग पर लगातार जलधारा गिरती रहती है, जिससे शिवजी के शरीर का तापमान सामान्य होता है. गलंतिका मिट्टी या किसी धातु की बनी होती है.
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